ब्लॉगसेतु

Saransh Sagar
224
Asutosh Shashank Shekhar Lyrics In Hindi आशुतोष शशाँक शेखर चन्द्र मौली चिदंबरा,कोटि कोटि प्रणाम शम्भू कोटि नमन दिगम्बरा,Ashutosh Shashank Shekhar Chandramauli ChidambaraKoti Koti Pranam Sambhu Koti Naman Digambaraनिर्विकार ओमकार अविनाशी तुम्ही देवाधि देव ,जगत सर्ज...
Saransh Sagar
224
तांडव स्तोत्र है आजीवन संकट को दूर रखने वाला कवच शिव ताण्डव स्तोत्र (शिवताण्डवस्तोत्रम्) परम शिवभक्त लंकापति रावण द्वारा गाया भगवान शिव का स्तोत्र है. इस स्तोत्र से जुड़ी कथा: मान्यता है कि एक बार रावण ने अपना बल दिखाने के लिए कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और जब...
Saransh Sagar
224
गोस्वामी तुलसीदास कृतसंकटमोचन हनुमानाष्टकबाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ॥देवन आन करि बिनती तब, छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥बालि की त्रास...
Saransh Sagar
224
 अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते...
Saransh Sagar
224
एक साधु वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था कि इस साधु ने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबला जा रहा था, तो मौसम के हिसाब से दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थी।साधु कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया। शायद भूख का एहसा...
Saransh Sagar
224
हिंदू विवाहित महिलाएं जिनके पति जीवित हैं, अपने सास-ससुर एवं पति की लम्बी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत को मानतीं हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों में विवाहित महिलाएं उत्तर भारतीयों की तुलना में 15 दिन बाद समान रीति से वट सावित्री व्रत मानतीं हैं।सा...
Saransh Sagar
224
ईश्वर सद्गुणों के संग्रह है ! संग्रह को अपनाया ही नही तो ईश्वर खुश नही होने वाले !! न घंटा बजाने से न कीर्तन करने से और न ही शंख बजाने से ! ये सब निजी संतुष्टि के उदाहरण मात्र है जिनसे एक निश्चित समय के लिये मानसिक और शारीरिक लाभ जरूर मिलता है पर जीवन को सन्मार्ग औ...
Saransh Sagar
224
सरस्वती वंदना -  हे शारदे माँ , हे शारदे माँहे शारदे माँ, हे शारदे माँ,अज्ञानता से हमें तार दे माँतू स्वर की देवी ये संगीत तुझ से,हर शब्द तेरा है हर गीत तुझ से,हम है अकेले, हम है अधूरे,तेरी शरण हम हमें प्यार दे माँहे शारदे माँ, हे शारदे माँ...अज्ञानता...
Saransh Sagar
224
श्री खाटू श्याम चालीसा - १ । । दोहा । । श्री गुरु चरण ध्यान धर , सुमिर सच्चिदानन्द । श्याम चालीसा भणत हूँ , रच चौपाई छंद । ॥ चौपाई ॥ श्याम श्याम भजि बारम्बारा , सहज ही हो भवसागर पारा । इन सम देव न दूजा कोई , दीन दयालु न दाता होई ।&nbsp...
Saransh Sagar
224
॥ दोहा ॥ विश्वेश्वर - पदपदम की रज - निज शीश - लगाय । अन्नपूर्णे ! तव सुयश बरनौं कवि - मतिलाय ॥ चौपाई ॥ नित्य आनंद करिणी माता , वर - अरु अभय भाव प्रख्याता । जय ! सौंदर्य सिंधु जग - जननी , अखिल पाप हर भव - भय हरनी । श्वेत बदन पर श्वेत बस...