ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 तुम्हें मालूम है उस दरमियाँ, ख़ामोश-सी रहती कुछ पूछ रही होती है, मुस्कुराहट की आड़ में बिखेर रही शब्द, तुम्हारी याद में वह टूट रही होती है |बिखरे एहसासात बीन रही, उन लम्हात में वह जीवन में मधु घोल रही होती है,  नमक का दरिया बने नयन...
सुनील  सजल
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लघु व्यंग्य -अंकुशगर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों के एक समूह ने अपनी अधीक्षिका के खिलाफ विद्रोह कर दिया ।वे शिकायत हेतु उच्च अधिकारी के पास पहुंची ।उनकी अधीक्षिका उन  पर अंकुश पर अंकुश लगाती हैं ।पीना-खाना, मौज-मस्ती,, घूमने -फिरने और लड़कों के संग दोस्ती पर अंगुलियां...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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तुम्हारी नजर तुम्हें न जानें, कितनी अदाओँ में देखा लेकिन आज तक समझ नहीं पाया जब मेरे सामने खड़ी   नजरें झुकाए रहती हो, तो लगता है मुझमें पूर्ण समर्पित हो, लेकिन जब पलकें उटाए खड़ी हो, तो लगता हैं कह रही हो मेरी तरफ घूर कर क्या देखते हो, आँख...
नवीन "राज" N.K.C
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उदासियाँ निचोड़ती है अश्क़ उतरती है अहसासों से , बिखरता है पल पल मोतियों की तरह लय टूटती है ऐसे सीने की साँसों से , बेक़ल है भीतर चेहरे पे मनहूसियत पसरी है तही चोटों पे ख़राशों से , शब्द है गौण अंदर प्रश्नोत्तर का सिलसिला है मौन है तन मन एकाकी आभासों से,...