ब्लॉगसेतु

शालिनी  रस्तौगी
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तलाक़! तलाक़!! तलाक़!!!इतनी ही स्पष्टता और दृढ़ता से कहे गए थेवे शब्दगुडबाय फ़ॉर एवर!!!और उसका मानो वक़्त वहीं थम गया।प्यार का अभिमान ओढ़ेकुछ देर वहीं खड़ी सोचती रही वोनहीं, ये शब्द उसके लिए नहीं थे ...प्यार ऐसे नहीं तोड़ा जाता ...शायद कुछ और ही होगा यहशायद गुस्सा, या मज़ाकप...
 पोस्ट लेवल : कविता नज़्म
शालिनी  रस्तौगी
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राब्ता हुआदो रूहों के दरम्यांऔर दो रूहें मिलकर एक सिम्त हो गईंफिर ज़िस्म ने सेंध लगाई रूहों के दरम्यांदो ज़िस्म मिले पर रूहें जुदा हो गईं...अब शिकायतें करती हैं रूहें एक दूसरे से कि हममें-तुममें नहीं रहा वो पहले-सा राब्ता शालिनी रस्तौगी 
 पोस्ट लेवल : नज़्म
शालिनी  रस्तौगी
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कभी इच्छाओं परकभी ख्वाहिशों पर कभी आँखों, कभी कानों, कभी जुबाँ पर वो एक – एक कर ताले जड़ती गई चाभियों को संभाला तो था ....कि कभो वक्त मिलेगा कभी तो वह मौका आएगा ..फिर खोल लेगी वह इनतालों को आज़ाद कर लेगी ख़ुद को अपनी ही कैद से पर .. अब जब वक़्त मिला है तो उन जाम हुए ता...
 पोस्ट लेवल : नज़्म
सुमन कपूर
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एक अरसे से कलम ख़ामोश थीऔर लफ्ज़ छुट्टी परइस बरस -नज़्मों के इम्तिहान में 'मन' फेल हो गया ..!!सु-मन
 पोस्ट लेवल : मन नज़्म
शालिनी  रस्तौगी
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जब भी मैं प्यार लिखूँतुम पढ़ लेना खुद को उसमें ।बिखरते लफ़्ज़ों को समेटरच दूँ जब नज़्म कोईतुम ढूँढ़ लेनाअनकहा पैगाम कोई।कभी मुस्कुराते लबऔर नम आँखें लिएगुनगुनाऊँ जो मैं ग़ज़ल कोई।तुम महसूस करनाउन अश'आरों मेंखामोश -सी आह कोई।कैनवास पर रंग बिखेरतीउँगलियों के अचानक थरथराने स...
 पोस्ट लेवल : नज़्म
शालिनी  रस्तौगी
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चलो अब बराबर, हिसाब किए लेते हैं।कुछ तुम रख लो , कुछ हम रख लेते हैं।हँसी - मुस्कुराहटों के पल तुम ले जाओ,आँसू का हिसाब हम किए लेते हैं।वो इंतेज़ार के पल, वो न मिल पाने की तड़पमिल्कियत है मेरी, सहेज रखूँगी ता उम्र,वस्ल की रातों के वो महके हुए लम्हें,अमानत हैं तुम्हारी...
 पोस्ट लेवल : नज़्म
anamika ghatak
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अश्कों को आँखों का ठौर पसन्द नहींउसे पूरी दुनिया से है वास्ता, हद हैकर भी लूँ नींदों से वाबस्ताख़्वाब बन जाता है हरजाई हद है  रिंदो साक़ी ने झूम के पिलाया जोघूँट पानी का न उतरा हद हैकर ली खूब मेहमाननवाज़ी भी हमनेहुए फिर भी बदनाम हद हैदो दिन ज़िन्दगी के चांदनी के च...
Sanjay  Grover
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पहले वे यहूदियों के लिए आएमैं वहां नहीं मिलाक्योंकि मैं यहूदी नहीं थाफिर वे वामपंथियों के लिए आएमैं उन्हें नहीं मिलाक्योंकि मैं वामपंथी नहीं थावे अब संघियों के लिए आएमैं नहीं मिलाक्योंकि मैं संघी नहीं थावे आए मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों मेंउन्होंने कोना-...
anamika ghatak
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ज़िन्दगी से कुछ इतने क़रीब हुएकि आईने से भी  हम अजनबी हुएरोशनी जो आँखों की नजर थीदिखाया नहीं कुछ जो बत्ती गुल हुएआ पँहुचे है ऐसी जहाँ में हमना ख़ुशी से ख़ुश औ' ना ग़म से ग़मसभी रास्तें  मिल जाते है जहाँउस जगह से रास्तों सा अलग हुएअच्छे-बुरे,सही-गलत पहचान न सके...
 पोस्ट लेवल : ग़म मशहूर नज़्म ज़िन्दगी
शालिनी  रस्तौगी
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हाथ में थमी     कलम की नोक पररखी हैं न जानेकितनी बातें, कितने अफ़साने,शब्दों में ढलने को आतुरहजारों ख्वाहिशें|पर कलम की नोक सेकागज़ तक का यह सफ़रइतना तो आसाँ नहीं,बीच में आ घेरते हैंन जाने कितने अंतर्द्वंद्वबाधा बन, राह रोकखड़ी हो जाती हैंन जाने कितनी वर...
 पोस्ट लेवल : नज़्म