ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
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एक गीत-नदी में जल नहीं हैधुन्ध में आकाश,पीले वन,नदी में जल नहीं है ।इस सदी मेंसभ्यता के साथक्या यह छल नहीं है ?गीत-लोरीकहकहेदालान के गुम हो गये,ये वनैलेफूल-तितली,भ्रमर कैसे खो गये,यन्त्रवतहोना किसीसंवेदना का हल नहीं है ।कहाँ तुलसीऔर कबिरा कापढ़े यह मंत्र काशी,लहरतार...
sanjiv verma salil
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मेरठ। सीसीएसयू के इतिहास विभाग में बुधवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में सरस्वती नदी की प्रमाणिकता के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने पौराणिक ग्रंथों के अतिरिक्त इसरो द्वारा किए गए शोध कार्य एवं अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से सरस्वती नदी की प्रमाणिकता...
 पोस्ट लेवल : सरस्वती नदी
सुशील बाकलीवाल
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          इन दिनों WhatsApp पर भारत के आम इन्सान की सोच व समस्या से मिलती-जुलती एक पोस्ट देखने में आ रही है । पसन्द आने पर मैं इसे अपने इस ब्लॉग पर भी शेअर कर रहा हूँ, उम्मीद है यदि आपने पहले इसे न देखा होगा तो आपको भी प...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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हाँ मैं चंबल नदी हूँ !ऊबड़-खाबड़ बीहड़ों मेंबहती हुई नाज़ से पली हूँ.रोना नहीं रोया हैअब तक मैंनेअपने प्रदूषित होने का, जैसा कि संताप झेल रही हैंहिमालयी नदियाँ दोगंगा-यमुना होने का.उद्गम महू-इंदौर सेयमुना में संगम भरेह-इटावा तकबहती हूँ कल-कल स्वयंवीरा,मुझमें समाया दर्द...
PRABHAT KUMAR
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नदी, चांद, सितारे सब जुदा हो गएमैं चमकता रहा सनम तुम्हारे प्यार मेंमुझमे दिखता रहा अक्स किसी और कामेरे लिए वो पागल थी और मैं सनम के प्यार मेंउसे छोड़ दिया मैंने जो मुझे चाहती बहुत थीमुझे छोड़ दिया किसी ने अपने सनम के प्यार मेंये जो जुदाई का आलम है वर्षों बाद अबमैं हो...
sanjiv verma salil
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नदी घाटी विकास आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,  प्रधान मंत्री भारत सरकार दिल्ली। मान्यवर!सादर वन्दे मातरम। मुझे आपका ध्यान नदी घाटियों के दोषपूर्ण विकास की ओर आकृष्ट करना है। मूलतः नदियाँ गहरी तथा किनारे ऊँचे पहाड़ियों की तरह और वनों...
 पोस्ट लेवल : nadi ghati vikas नदी घाटी विकास
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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राजेंद्र  गुप्ता
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 पोस्ट लेवल : नदी river
Akhilesh Karn
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गायक : आरती मुखर्जी एलबम : गंगा घाटगीतकार: राजपतिसंगीतकार :  नदीम श्रवणम्यूजिक कंपनी : सारेगामाचाहे पैंया पड़ चाहे पैंया पड़ चाहे नाक रगड़चाहे पैंया पड़ चाहे नाक रगड़हम ते अंगुरी पे तोहके नचौबे रसियाधीरे से पतरी कमर लचकैबै तओ धीरे से पतरी कमर लचकैबै तधरती...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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नदी तुम माँ क्यों हो...?सभ्यता की वाहक क्यों हो...?आज ज़ार-ज़ार रोती क्यों हो...?   बात पुराने ज़माने की है जब गूगल जीपीएस कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के नक़्शे दिशासूचक यंत्र आदि नहीं थे एक आदमीअपने...