ब्लॉगसेतु

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--चमकती बिजुरिया चपला,गगन में मेघ हैं छाये।मिटाने प्यास धरती की,जलद जल धाम ले आये।--धरा की घास थी सूखी,त्वचा थी राख सी रूखी,हुई घनघोर जब बारिस,नदी-नाले उफन आये।मिटाने प्यास धरती की,जलद जल धाम ले आये।।--दिवस में छिप गया सूरज,दबा माटी का उड़ता रज,किसानों के लिए बादल,स...
 पोस्ट लेवल : गीत नदी-नाले उफन आये
sanjiv verma salil
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गीत नदी मर रही है*नदी नीरधारी, नदी जीवधारी,नदी मौन सहती उपेक्षा हमारीनदी पेड़-पौधे, नदी जिंदगी है-भुलाया है हमने नदी माँ हमारीनदी ही मनुज कासदा घर रही है।नदी मर रही है*नदी वीर-दानी, नदी चीर-धानीनदी ही पिलाती बिना मोल पानी,नदी रौद्र-तनया, नदी शिव-सुता है-नदी सर-...
 पोस्ट लेवल : नदी मर रही है गीत
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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बसंत तुम आ तो गये हो? लेकिन कहाँ है...तुम्हारी सौम्य सुकुमारता ?आओ!देखो!कैसे कोमल मन है हारता।खेत, नदी, झरने, बर्फ़ीली पर्वत-मालाओं में फ़स्ल-ए-गुल के अनुपम नज़ारे, बुलबुल, कोयल, मयूर, टिटहरी टीसभरे बोलों से बसंतोत्सव को पुकारे।&nbsp...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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जीवन कि लड़ाइयों से,लड़ रहा हूं मैंचाहे कुछ भी हो लेकिन,आगे बढ़ रहा हूं मैंकुछ इस कदरनदी के रूप सा, ढल रहा हूं मैंतपती धूप में भीचल रहा हूं मैं।।
YASHVARDHAN SRIVASTAV
679
थके थके बिना रुकेचल रहे राहों पे हम।।१।।मुश्किलें नहीं है कमफिर भी बढ़ रहे है,ये कदम।।२।।न पीछे रह जाने का डरन ही आगे होने का घमंड।।३।।बस एक राह पकड़उस पर चल दिये है हम।।४।।नदियों सा ये सफरसमंदर की ना कोई खबर।।५।।अनजाने रास्तों पर ही सहीपर आगे तुम बढ़ सकते हो।।६।।म...
मुकेश कुमार
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ज़ीरो डिग्री पर जम जानारूम टेम्परेचर पर पिघल जानासौ पर खौलने लगनातापमान का ये प्रतिकारक असरपरिवर्तित होता रहता है स्थिति के अनुरूपलेकिनस्नेह किअजब-गजब अनुभूतिरहने नहीं देता एक सा तापमानएक हलकी सी स्मित मुस्कानऔर फिरभरभरा कर गुस्स्से से चूर व्यक्तिटप से बहा देता...
लोकेश नशीने
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तुम सोचते हो किघर से निकाले गएमाँ-बाप बेघर हो जाते हैं,नहीं, नासमझी है ये तुम्हारी,बल्किमाँ-बाप के चले जाने सेतुम्हारा घर हीबेघर हो जाता हैचित्र साभार- गूगल
 पोस्ट लेवल : Nadeesh नज़्म नासमझी nazm poetry नदीश
लोकेश नशीने
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ये कैसी तन्हाई है कि सुनाई पड़ता हैख़्यालों का कोलाहलऔर सांसों का शोरभाग जाना चाहता हूँऐसे बियावां मेंजहाँ तन्हाई होऔर सिर्फ तन्हाईलेकिननाकाम हो जाती हैंतमाम कोशिशेंक्योंकिमैं जब भी निचोड़ता हूँअपनी तन्हाई कोतो टपक पड़ती हैकुछ बूंदेंतेरी यादों कीचित्र साभार- गूगल
jaikrishnarai tushar
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एक गीत-नदी में जल नहीं हैधुन्ध में आकाश,पीले वन,नदी में जल नहीं है ।इस सदी मेंसभ्यता के साथक्या यह छल नहीं है ?गीत-लोरीकहकहेदालान के गुम हो गये,ये वनैलेफूल-तितली,भ्रमर कैसे खो गये,यन्त्रवतहोना किसीसंवेदना का हल नहीं है ।कहाँ तुलसीऔर कबिरा कापढ़े यह मंत्र काशी,लहरतार...
sanjiv verma salil
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मेरठ। सीसीएसयू के इतिहास विभाग में बुधवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में सरस्वती नदी की प्रमाणिकता के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने पौराणिक ग्रंथों के अतिरिक्त इसरो द्वारा किए गए शोध कार्य एवं अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से सरस्वती नदी की प्रमाणिकता...
 पोस्ट लेवल : सरस्वती नदी