जब पढ़ते थे तो तरह-तरह के लोगों को पढ़ते थे। साहित्य अच्छा तो लगता ही था मगर यह दिखाना भी अच्छा लगता था कि ‘देखो, हम दूसरों से अलग हैं, हम वह साहित्य भी पढ़ते हैं जो हर किसी की समझ में नहीं आता।’ अब सोचते हैं कि हमारी भी समझ में कितना आता था! गुलशन नंदा, रानू, कर्नल र...