ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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सॉनेटसुतवधु *सुतवधु आई, पर्व मन रहा।गूँज रही है शहनाई भी।ऋतु बसंत मनहर आई सी।। खुशियों का वातास तन रहा।। ऊषा प्रमुदित कर अगवानी।रश्मिरथी करता है स्वागत। नज़र उतारे विनत अनागत।।  शुभद सुखद हों मातु भवानी।।जाग्रत धूम्रित श्वास वेदिका।&nbs...
girish billore
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 हमारे जातीय बंधु भाई अवधेश कानूनगो जी के गांव में निवास करने वाले पैदल परिक्रमा पथ नर्मदा परिक्रमा के गांव के श्री जगदीश भाई ने 99 दिनों में पूर्ण की। जगदीश भाई ने श्री अवधेश जी को बताया कि वे जिस मार्ग से गुजरे उस को  दूरियों कितनी हैं । कृ...
jaikrishnarai tushar
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 काशी गंगा घाटएक गीत-देवगंगा हो हमारी या तुम्हारी नर्मदा होदेव गंगा हो हमारी यातुम्हारी नर्मदा हो ।घाट परउत्सव मनातीसंस्कृति यह सर्वदा हो ।कुम्भ ,छठ होया चतुर्थीचौथ का जलता दिया हो,पुण्य सबकोमिले चाहेपत्र का वह हाशिया हो,अमावस्यापंचमी का चाँद हो या प...
sanjiv verma salil
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 नर्मदा कथा १*माँ नर्मदा! जगतारिणी। सुरमोहिनी, शिवभावनी।।हे चंद्रबिंदु सुसज्जिता। हे स्वेद-धार निमज्जिता।।गिरि अमरकंटक से बहीं। युग-चेतना अनगिन तहीं।। हे वंशलोचनवंशिनी। रुद्राक्षतनया हंसिनी।।हर कष्ट लूँ सब सृष्टि के। दूँ मिटा क्लेश अवृष्टि के।। प्रगटीं पुलक म...
 पोस्ट लेवल : नर्मदा कथा १
sanjiv verma salil
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साहित्य समीक्षा_दोहा-दोहा नर्मदासुरेन्द्र सिंह पंवारसम्पादक- “साहित्य-संस्कार”[कृति- दोहा-दोहा नर्मदा/ संपादक-आचार्य संजीव ‘सलिल’- प्रो.(डा) साधना वर्मा/ प्रकाशक- विश्व वाणी हिंदी संस्थान,समन्वय प्रकाशन अभियान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन,जबलपुर ४८२००१, पृष्ठ...
sanjiv verma salil
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नर्मदा नामावलीआचार्य संजीव 'सलिल'*पुण्यतोया सदानीरा नर्मदा.शैलजा गिरिजा अनिंद्या वर्मदा.शैलपुत्री सोमतनया निर्मला.अमरकंटी शांकरी शुभ शर्मदा.आदिकन्या चिरकुमारी पावनी.जलधिगामिनी चित्रकूटा पद्मजा.विमलहृदया क्षमादात्री कौतुकी.कमलनयनी जगज्जननि हर्म्यदा.शाशिसुता रौद्रा व...
 पोस्ट लेवल : नर्मदा नामावली
sanjiv verma salil
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षड्पदी नर्मदा भक्ति-भाव की विमल नर्मदा में अवगाहन कर तर जाएँ. प्रभु ऐसे रीझें, भू पर आ, भक्तों के संग नाचें-गाएँ.....
 पोस्ट लेवल : षड्पदी नर्मदा
sanjiv verma salil
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नवगीत :संजीव*विंध्याचल कीछाती पर हैंजाने कितने घावजंगल कटेपरिंदे गायबधूप न पाती छाँव*ऋषि अगस्त्य की करी वन्दनाभोला छला गया.'आऊँ न जब तक झुके रहो' कहचतुरा चला गया.समुद सुखाकर असुर सँहारेकिन्तु न लौटे आप-वचन निभाताविंध्य आज तकहारा जीवन-दाँव.*शोण-जोहिला दुरभिसंधि करमे...
sanjiv verma salil
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मुक्तकनेह नर्मदा में अवगाहो, तन-मन निर्मल हो जाएगा।रोम-रोम पुलकित होगा प्रिय!, अपनेपन की जय गाएगा।।हर अभिलाषा क्षिप्रा होगी, कुंभ लगेगा संकल्पों का,कोशिश का जनगण तट आकर, फल पा-देकर तर जाएगा।।७-६-२०१६http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
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ॐ नर्मदाष्टकं : ३                  श्री मैथिलेन्द्र झा रचित नर्मदाष्टक - हिन्दी काव्यानुवाद आचार्य संजीव 'सलिल'*भजन्तीं जनुं शैलजाकांतकायद्भवन्तीं बहिर्भूतले विन्ध्यशैलात.वहन्...