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sanjiv verma salil
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नवगीतसाक्षी*साक्षीदेगा समय खुद*काट दीवारें रही हैंतोड़ना है रीतियाँ सबथोपना निज मान्यताएँभुलाना है नीतियाँ अबकौन-किसका हाथ थामेछोड़ दे कब?हुए कपड़ों की तरहअबदेह-रिश्ते,नेह-नातेकूद मीनारें रही हैंसाक्षी देगा समय खुद*घरौंदे बंधन हुए हैंआसमानों की तलब हैलादना अपना नजर...
 पोस्ट लेवल : नवगीत साक्षी
sanjiv verma salil
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नवगीत:हारे हैं...संजीव 'सलिल'*कौन किसे कैसे समझाएसब निज मन से हारे हैं?.....*इच्छाओं की कठपुतली हमबेबस नाच दिखाते हैं.उस पर भी तुर्रा यह खुद कोतीसमारखाँ पाते हैं.रास न आये सच कबीर काहम बुदबुद गुब्बारे हैं...*बिजली के जिन तारों सेटकरा पंछी मर जाते हैं.हम नादां उनसे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत :संजीव*विंध्याचल कीछाती पर हैंजाने कितने घावजंगल कटेपरिंदे गायबधूप न पाती छाँव*ऋषि अगस्त्य की करी वन्दनाभोला छला गया.'आऊँ न जब तक झुके रहो' कहचतुरा चला गया.समुद सुखाकर असुर सँहारेकिन्तु न लौटे आप-वचन निभाताविंध्य आज तकहारा जीवन-दाँव.*शोण-जोहिला दुरभिसंधि करमे...
sanjiv verma salil
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नवगीत :समारोह है*समारोह हैसभागार में।*ख़ास-ख़ास आसंदी पर हैं,खासुलखास मंच पर बैठे।आयोजक-संचालक गर्वित-ज्यों कौओं में बगुले ऐंठे।करतल ध्वनि,चित्रों-खबरों मेंरूचि सबकी हैनिज प्रचार में।*कुशल-निपुण अभियंता आए,छाती ताने, शीश उठाए।गुणवत्ता बिन कार्य हो रहे,इन्हें न मतलब,...
 पोस्ट लेवल : नवगीत समारोह है
sanjiv verma salil
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नवगीत धरती की छाती पै होरारओ रे सूरज भून।*दरक रे मैदान-खेत सबमुरझा रए खलिहान।माँगे सीतल पेय भिखारीले न रुपया दान।संझा ने अधरों पे बहिनालगा रखो है खून।धरती की छाती पै होरारओ रे सूरज भून।*धोंय, निचोरें सूखें कपरापहने गीले होंय।चलत-चलत कूलर हीटर भओपंखें चल-थक रों...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत शहर*मेरा शहरन अब मेरा है,गली न मेरीरही गली है।*अपनेपन की माटी गायब,चमकदार टाइल्स सजी है।श्वान-काक-गौ तकें, न रोटीमृत गौरैया प्यास लजी है।सेव-जलेबी-दोने कहीं न,कुल्हड़-चुस्की-चाय नदारद।खुद को अफसर कहता नायब,छुटभैया तन करे अदावत।अपनेपन कोदे तिलांजलि,राजनीति...
 पोस्ट लेवल : नवगीत शहर
sanjiv verma salil
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नवगीत :तुम*तुम मुस्काईंतो ऊषा केहुए गुलाबी गाल।*सूरज करता ताका-झाँकीमन में आँकें सूरत बाँकीनाच रहे बरगद बब्बा भीझूम दे रहे ताल।तुम इठलाईंतो पनघट पेकूकी मौन रसाल।तुम मुस्काईंतो ऊषा केहुए गुलाबी गाल।*सद्यस्नाता बूँदें बरसेंदेख बदरिया हरषे-तरसेपवन छेड़ता श्यामल कुंतलउल...
 पोस्ट लेवल : नवगीत तुम
sanjiv verma salil
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नवगीत संजीव*नहा रहे हैंबरसातों मेंहरे-भरे बतियाते झाड़अपनी जगहहमेशा ठांड़ेझूम-झूम मस्ताते झाड़*सूर्य-बल्बजब होता रौशनमेक'प करते बिना छिपे.शाखाओं,कलियों फूलों सेमिलते, नहीं लजाते झाड़नहा रहे हैंबरसातों मेंहरे-भरे बतियाते झाड़अपनी जगहहमेशा ठांड़ेझूम-झूम मस्ताते झाड़*बऊ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
अभिलाषा चौहान
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