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sanjiv verma salil
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नवगीत:आओ! तम से लड़ें...संजीव 'सलिल'*आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***माटी माता,कोख दीप है.मेहनत मुक्ताकोख सीप है.गुरु कुम्हार है,शिष्य कोशिशें-आशा खूनखौलता रग में.आओ! रचते रहेंगीत फिर गायें जग में.आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***आखर ढाईपढ़े न अब तक.अ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
sanjiv verma salil
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नवगीत :संजीव *संसद की दीवार पर दलबन्दी की धूल राजनीति की पौध परअहंकार के शूल*राष्ट्रीय सरकार कीहै सचमुच दरकारस्वार्थ नदी में लोभ कीनाव बिना पतवारहिचकोले कहती विवशनाव दूर है कूललोकतंत्र की हिलातेहाय! पहरुए चूल*गोली खा, सिर कटाकरतोड़े थे कानूनक्या सोचा...
sanjiv verma salil
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नवगीत *बारिश तो अब भी होती है लेकिन बच्चे नहीं खेलते. *नाव बनाना कौन सिखाये?बहे जा रहे समय नदी में.समय न मिलता रिक्त सदी में.काम न कोईकिसी के आये.अपना संकट आप झेलतेबारिश तो अब भी होती हैलेकिन बच्चे नहीं खेलते.*डेंगू से भय-भीत सभी हैं.नहीं भरोसा...
sanjiv verma salil
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नवगीत *तन पर पहरेदार बिठा दो चाहे जितने, मन पाखी कोकैद कर सकेकिसका बूता?*तनता-झुकताबढ़ता-रुकतातन ही हरदम।हारे ज्ञानीझुका न पायेमन का परचम।बाखर-छानीरोक सकी कबपानी चूता?मन पाखी कोकैद कर सकेकिसका बूता?*ताना-बानाबुने कबीराढाई आखर।ज्यों की त्यों हीधर...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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समीक्षा :बुधिया लेता टोह : चीख लगे विद्रोहआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'स्वातंत्र्योत्तर भारतीय साहित्य छायावादी रूमानियत (पंत, प्रसाद, महादेवी, बच्चन), राष्ट्रवादी शौर्य (मैथिली शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, सोहनलाल द्विवेदी) और प्रगतिवादी यथार्थ (निराला, नागार...
shashi purwar
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श्वेत चाँदनी पंख पसारे उतरी ज्यों उपवन में पुष्प कुटज के जीवट लगते चटके सुन्दर, वन मेंश्वेत श्याम सा रूप सलोना फूल सुगन्धित काया काला कड़वा नीम चढ़ा है ग्राही शीतल मायाछाल जड़ें और बीज औषिधि व्याधि हरे जीवन में पुष्प कुटज के जीव...
 पोस्ट लेवल : कुटज के फूल नवगीत गीत
sanjiv verma salil
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बुंदेली नवगीत  कनैया नई सुदरो*नई सुदरो, बब्बा नई सुदरो मन कारो, कनैया नई सुदरो*कालिज मा जा खेंनें खोलें किताबेंभासन दें, गुंडों सेंऊधम कराबेंअधनंगी मोंड़िन सँगफोटू खिंचाबेभारत मैया कींनाक कटाबेफरज निभाबें माबा पिछरोमन कारो,कनैया नई सुदरो*दुसमन की...
 पोस्ट लेवल : नवगीत bundeli navgeet बुंदेली
sanjiv verma salil
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बुंदेली नवगीत :का बिगार दओ?*काए फूँक रओ बेदर्दी सें हो खें भाव बिभोर?का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*हँस खेलत तीसंग पवन खेंपेंग भरत ती खूब।तेंदू बिरछाबाँह झुलाउतरओ खुसी में डूब।कें की नजरलग गई दइया!धर लओ मो खों तोर।का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*क...
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sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव *गैर कहोगे जिनको वे ही मित्र-सगे होंगे*ना माँगेंगे पानी-राशनना चाहेंगे प्यारनहीं लगायेंगे वे तुमकोअनचाहे फटकारशिकवे-गिले-शिकायततुमसे?, होगी कभी नहींन ही जतायेंगे वे तुम परकभी तनिक अधिकारकाम पड़े पर नहींआचरणप्रेम-पगे होंगेगैर कहोगे जिनकोवे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
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समीक्षा :''है छिपा सूरज कहाँ पर'' : खोजिए नवगीत मेंआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल"*[कृति विवरण : है छिपा सूरज कहाँ पर, नवगीत संग्रह, गरिमा सक्सेना, प्रथम संस्करण २०१९, आई.एस.बी.एन. ९७८९३८८९४६१७९, आकार २२ से.मी. x १४.से.मी., आवरण बहुरंगी सजिल्द लेमिनेटेड जैकेट सहित,...