ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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जलती देह नारी की विधाता,  क्रूर  निर्मम प्राणी  रचाया । क्रोध द्वेष दंभ हृदय में इसके, क्यों अगन तिक्त भार बढ़ाया ।सृजन नारी का सृजित किया है, ममत्त्व वसुधा पर लावन को।दुष्ट अधर्मी मानव जो पापी,आकुलता सिद्धी पावन को।भद्र भाव का करत...
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
अनीता सैनी
28
खिल उठेगा आँचल धरा का, मानव मन अब अवसाद न कर, चहुओर प्रेम पुष्प खिलेंगें समय साथ है आशा तू धर।  पतझर पात विटप से झड़ते, बसँत नवाँकुर खिल आएगा, खुशहाली भारत में होगी  गुलमोहर-सा खिल जाएगा, बितेगा फिर समय ये भारी,  संय...
sanjiv verma salil
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नवगीत*पीर ने पूछेंदोस दै रयेकाय निकल रय?कै तो दई 'घर बैठो भइया'दवा गरीबी की कछु नइयाढो लाये कछु कौन बिदेस सेंहम भोगें कोरोना दइयारोजी-रोटी गईराम रे! हांत सें    तोते उड़ रयदो बचो-बचाओ खाओफिर उधार सें काम चलाओदो दिन भूखे बैठ बिता लएजान बचाने, गाँव...
 पोस्ट लेवल : कोरोना नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:*गरियाए बिनहजम न होताखाना, किसको कोसें?.वैचारिक प्रतिबद्ध भौत हमजो न साथ हो, करें फौत हमझूठ - हकीकत क्या?क्यों सोचें?स्वार्थ जियें, सर्वार्थ-मौत हमजुतियाए बिननींद न आतीबैर हमेसा पोसें.संसद हो या टी. व्ही. चरचाजन-धन का लाखों हो खरचानकल मार  याधमकी दे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत : bhasha geet
अनीता सैनी
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प्रीत व्यग्र हो कहे राधिका, घूँघट ओट याद हर्षाती ।मुँह फेरुँ तो मिले कान्हाई, जीवन मझधारे तरसाती ।।साँझ-विहान गुँजे अभिलाषा, मनमोहिनी- मिलन को आयी। प्रिये की छवि उतरी नयन में, अश्रुमाला गिर हिय समायी। जलती पीड़ा दीप माल-सी,  ...
अनीता सैनी
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पी प्रीत में कान्हा से कहे राधिका, घूँघट ओढ़े  याद हर्षाया करती है, मुँह फेरुँ राह में मिले मनमौजन-सी, जीवन मझधार में रुलाया करती है।  साँझ-सवेरे गुँजित डोले अभिलाषा, मनमोहिनी मिलने मुझसे आयी, परछाई प्रिये की  उतरी नयनन में,&n...
sanjiv verma salil
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नवगीत-दरक न पाऐँ दीवारेंहम में हर एक तीसमारखाॅंकोई नहीं किसी से कम ।हम आपस में उलझ-उलझकरदिखा रहे हैं अपनी दम ।देख छिपकली डर जाते परकहते डरा न सकता यम ।आॅंख के अंधे देख-न देखेंदरक रही हैं दीवारें ।*फूटी आॅंखों नहीं सुहातीहमें, हमारी ही सूरत ।मन ही मन में मनमाफि़कगढ़...
 पोस्ट लेवल : नवगीत 2018 ki laghukathayen
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
अनीता सैनी
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मूरत मन की  पूछ रही है, नयनों से लख-लख प्रश्न प्रिये, जीवन तुझपर वार दिया है,साँसें पूछ रहीं हाल प्रिये। समय निगोड़ा हार न माने,पुरवाई उड़ती उलझन में,पल-पल पूछूँ हाल उसे मैं,नटखट उलझाता रुनझुन मेंकुशल संदेश पात पर लिख दो,चंचल चित्त अति व्याकुल प्र...