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sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीवउड़ चल हंसामत रुकनायह देश पराया है.ऊपर-नीचे बादल आयेसूर्य तरेरे आँख, डरायेकहीं स्वर्णिमा, कहीं कालिमाभ्रमित न होनामत मुड़नायह देश सुहाया है.पंख तने हों ऊपर-नीचेपलक न पल भरअँखियाँ मीचेऊषा फेंके जाल सुनहरामुग्ध न होनामत झुकनामत सोच बुलाया है.http://divyanarm...
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sanjiv verma salil
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नवगीत*रहे तपते गर्मियों मेंबारिशों में टपकते थेसर्दियों में हुए ठन्डेरौशनी गायब हवाआती नहीं हैघोंसलें है कॉन्क्रीटीघुट रही दमहवा तक दूभर हुई हैसोम से रवि तक न अंतरएक से सब डेश्वास नदिया सूखतीहै नहीं पानीआस घाटों पर न मेलेनहीं हलचलकिंतु हटने को नहींतैयार तिल भर भी य...
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sanjiv verma salil
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नवगीत *रहे तपते गर्मियों में बारिशों में टपकते थे सर्दियों में हुए ठन्डे रौशनी गायब हवा आती नहीं हैघोंसलें है कॉन्क्रीटी घुट रही दम हवा तक दूभर हुई है सोम से रवि तक न अंतर एक से सब डे श्वास नदिया सूखती है नहीं पानी आस घाटों पर न मेले नहीं हलचल किंतु हटने को नह...
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Nitu  Thakur
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नवगीत खेल रही है किस्मत चौसर फेक रही है कैसे पासेभ्रमित हो रहा मानव ऐसेमानवता मिट रही धरा से1जीवन का उद्देश्य भुलाकरदास बने धन को अपनाकरतिमिर व्याप्त है सारे जग मेंअंतर्मन की चीख मिटाकरकठपुतली बन जीवन जीते, कौन ज्ञान के दीपक चासेभ्रमित हो रहा मानव ऐस...
sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव.वह खासों में खास हैरूपया जिसके पास है.सब दुनिया में कर अँधियारावह खरीद लेता उजियारामेरी-तेरी खत कड़ी होपर उसकी होती पौ बाराअसहनीय संत्रास हैवह मालिक जग दास है.था तो वह सच का हत्यारालेकिन गया नहीं दुतकारान्याय वही, जो राजा करतासौ ले दस देकर उपकारासीता का...
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sanjiv verma salil
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बाल नवगीत:संजीव*सूरज बबुआ!चल स्कूल.धरती माँ की मीठी लोरीसुनकर मस्ती खूब करीबहिन उषा को गिरा दियातो पिता गगन से डाँट पड़ीधूप बुआ ने लपक चुपायापछुआ लाईबस्ता-फूलसूरज बबुआ!चल स्कूल.जय गणेश कह पाटी पूजनपकड़ कलम लिख ओमपैर पटक रो मत, मुस्काकरदेख रहे भू-व्योमकन्नागोटी, पिट्ट...
 पोस्ट लेवल : नवगीत सूरज बालगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव.दर्पण का दिल देखताकहिए, जग में कौन?.आप न कहता हालभले रहे दिल सिसकताकरता नहीं खयालनयन कौन सा फड़कता?सबकी नज़र उतारतालेकर राई-नौन.पूछे नहीं सवालनहीं किसी से हिचकताकभी न देता टालऔर न किंचित ललकतारूप-अरूप निहारतालेकिन रहता मौन.रहता है निष्पक्षविश्व हँसे या सि...
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sanjiv verma salil
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नवगीत *भीड़ का हिस्सा नहींछाँव हूँ मैं, धूप भी हूँखेत हूँ मैं, कूप भी हूँमहल का ठस्सा नहींलोक हूँ मैं स्वाभिमानीदेशप्रेमी आत्मदानीवायवी किस्सा नहींखींच कर तृष्णा बुझाओगले बाँधो, मुक्ति पाओकसूरी रस्सा नहींभाग्य लिखता कर परिश्रमबाँध मुट्ठी, आँख रख नमबेतुका घिस्स...
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sanjiv verma salil
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नवगीत:*सत्याग्रह के नाम पर.तोडा था कानूनलगा शेर की दाढ़ मेंमनमानी का खून*बीज बोकर हो गये हैं दूरटीसता है रोज ही नासूरतोड़ते नेता सतत कानूनसियासत है स्वार्थ से भरपूर.भगतसिंह से किया था अन्यायकौन जाने क्या रहा अभिप्राय?गौर तन में श्याम मन का वासदेश भक्तों को मिला संत्र...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव.लोकतंत्र कापंछी बेबस.नेता पहले डालें दानाफिर लेते पर नोचअफसर रिश्वत गोली मारेंकरें न किंचित सोचव्यापारी देनशा रहा डँस.आम आदमी खुद में उलझादे-लेता उत्कोचन्यायपालिका अंधी-लूलीपैरों में है मोचठेकेदार-दलालों को जस.राजनीति नफरत की मारीलिए नींव में पोचजनमत बह...
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