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sanjiv verma salil
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कृति चर्चा 'पोखर ठोंके दावा' : जल उफने ज्यों लावा चर्चाकार : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण : पोखर ठोंके दावा, नवगीत संग्रह, अविनाश ब्योहार, प्रथम संस्करण २०१९, आकार  २० से. x १३ से., आवरण बहुरंगी पेपरबैक, पृष्ठ १२०, प्रकाशन काव्य प्...
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कृति चर्चा: चुप्पियों को तोड़ते हैं  -  नवाशा से जोड़ते हैं  चर्चाकार : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*                                सृष्टि के निर्माण का मूल 'ध्वनि'...
sanjiv verma salil
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नवगीत*दर्द होता हैमगरचुपचाप सहता।*पीर नदियों कीसुनाते घाट देखे।मंज़िलों का दर्दकहते ठाठ लेखे।शूल पैरों को चुभेकितने, कहाँ, कब?मौन बढ़ता कदमचुप रहनहीं कहता?*चूड़ियों की कथापायल ने कही है।अचकनों की व्यथाअनसुन ही रही है।मर्द को हो दर्दजग कहता, न होताशिला निष्ठुर मौनझरनाप...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:महका-महकासंजीवमहका-महकामन-मंदिर रख सुगढ़-सलौनाचहका-चहकाआशाओं के मेघ न बरसेकोशिश तरसेफटी बिमाई, मैली धोतीनिकली घर सेबासन माँजे, कपड़े धोएकाँख-काँखकरसमझ न आए पर-सुख सेहरसे या तरसेदहका-दहकाबुझा हौसलों का अंगारालहका-लहकाएक महल, सौ यहाँ झोपड़ीकौन बनाएऊँच-नीच यह, कह...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:राष्ट्रलक्ष्मी!श्रम सीकर हैतुम्हें समर्पितखेत, फसल, खलिहानप्रणत हैअभियन्ता, तकनीकविनत हैबाँध-कारखानेनव तीरथहुए समर्पितकण-कण, तृण-तृणबिंदु-सिंधु भीभू नभ सलिलादिशा, इंदु भीसुख-समृद्धि हितकर-पग, मन-तनसमय समर्पितपंछी कलरवसुबह दुपहरीसंध्या रजनीकोशिश ठहरीआसें-श्वास...
sanjiv verma salil
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नवगीतलछमी मैया!माटी का कछु कर्ज चुकाओ*देस बँट रहो,नेह घट रहो,लील रई दीपक खों झालरनेह-गेह तज देह बजारूभई; कैत है प्रगतिसील हम।हैप्पी दीवालीअनहैप्पी बैस्ट विशेज से पिंड छुड़ाओ*मूँड़ मुड़ाएओले पड़ रएमूरत लगे अवध में भारीकहूँ दूर बनवास बिता रईअबला निबल सिया-सत मारीहाय!...
 पोस्ट लेवल : नवगीत लछमी मैया
Basudeo Agarwal
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मन-भ्रमर काव्य-उपवन मेंपगले डोल।जिन कलियों को नित चूमे,जिन पर तुम गुंजार करे,क्यों मग्न होय इतना झूमे,इक दिन उनका पराग झरे,लो ठीक से तोल।  मन-भ्रमर काव्य-उपवन में  पगले डोल।क्षणिक मधु के पीछे भागे,नश्वर सुख में है तु रमा,कैसे तेरे भाग हैं जागे,जो इनमें तु...
sanjiv verma salil
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एक रचना*महरी पर गड़तीगृद्ध-दृष्टि साहो रहा पर्यावरण*दोष अपना और पर मढ़सभी परिभाषा गलत पढ़जिस तरह हो सीढ़ियाँ चढ़  देहरी के दूरमिट्टी गंदगी साकर रहे हैं आचरण*हवस के बनकर पुजारीआरती तन की उतारीदियति अपनी खुद बिगाड़ीचीयर डालाअसुर बनकरमाँ धरा का...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
sanjiv verma salil
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एक रचना *भोर हुई छाई अरुणाई जगना तनिक न भला लगा *छायद तरुनर बना कुल्हाड़ी खोद रहा अरमान-पहाड़ी हुआ बस्तियों में जल-प्लावन मनु! तूने ही बात बिगाड़ी।अनगिन काटे जंगल तूनेअब तो पौधा नया लगा *टेर; नहीं गौरैया आती पवन न गाती पुलक प्रभाती धुआँ; धूल; कोलाहल बेहद सौंप रहे जहरी...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
sanjiv verma salil
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नवगीत:आओ! तम से लड़ें...संजीव 'सलिल'*आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***माटी माता,कोख दीप है.मेहनत मुक्ताकोख सीप है.गुरु कुम्हार है,शिष्य कोशिशें-आशा खूनखौलता रग में.आओ! रचते रहेंगीत फिर गायें जग में.आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***आखर ढाईपढ़े न अब तक.अ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet