ब्लॉगसेतु

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मित्रों!      कुछ प्रश्न मेरे मन में आज भी अनवरतरूप से चलते रहते हैं, और वो हैं कि मैं ब्लॉगिंग क्यों करता हूँ? न तो इसमें कोई पारिश्रमिक है और न ही कोई पारितोषिक है, फिर मैं प्रतिदिन अनवरतरूप से अपने 4-5 घण्टे क्यों नष्ट करता हूँ? तो...
Kajal Kumar
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 पोस्ट लेवल : ncb नशा drugs
sanjiv verma salil
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विशेष लेखनशा: कारण और निवारणआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*नशा क्या है-किसी सामान्य मनुष्य की मानसिक स्थिति को बदलकर नींद या मदहोशी की हालत में ला देने वाले पदार्थ नारकॉटिक्स, ड्रग्स या नशा कहलाते है। मॉर्फिन, कोडेन, मेथाडोन, फेंटाइनाइल आदि नारकॉटिक्स चूर्ण (पाउडर), गोल...
 पोस्ट लेवल : नशा लेख
Saransh Sagar
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 हम और आप व्यस्तम जीवन में इतने व्यस्त हो चुके है कि समाज की बुराइयों को ये कहकर नजरंदाज कर देते है कि छोड़ो हमे क्या ! इनका रोज का काम है ! कीचड़ पर पत्थर मारने से छींटे हमे ही पड़ते है और न जाने कितने कारण और वजह तुरंत खोज लेते है ऐसे सामाजिक जिम्मेदारी से बचने...
सुशील बाकलीवाल
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        जीवन में हम सभी की पहली आवश्यकता होती है अपनी आत्मनिर्भरता के दौर में सबसे पहले अपने परिवार की सुविधा व सुरक्षा हेतु एक मकान का इन्तजाम करना । जो लोग इसका इन्तजाम कर लेते हैं वे अपना आगामी जीवन परिवार सहित वहाँ सुकूनपूर्वक बिता पाते हैं...
सुशील बाकलीवाल
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           बाबु मोशाय... कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी आदमी ने हमारा कोई भला नहीं किया लेकिन वो हमें अच्छा लगता है । हाँ...  और कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी आदमी ने हमारा कोई बुरा नहीं किया, लेकिन वो हमें बिल्कुल...
sanjiv verma salil
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विशेष लेखनशा: कारण और निवारणआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*नशा क्या है-किसी सामान्य मनुष्य की मानसिक स्थिति को बदलकर नींद या मदहोशी की हालत में ला देने वाले पदार्थ नारकॉटिक्स, ड्रग्स या नशा कहलाते है। मॉर्फिन, कोडेन, मेथाडोन, फेंटाइनाइल आदि नारकॉटिक्स चूर्ण (पाउडर), गोल...
Yashoda Agrawal
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पूछो न बिना तुम्हारे कैसे सुबह से शाम हुईपी-पीकर जाम यादों के ज़िंदगी नीलाम हुईदर्द से लबरेज़ हुआ कोरा काग़ज़ दिल कालड़खड़ाती हर साँस ख़ुमारी में बदनाम हुईइंतज़ार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब, वफ़ा, नशातमाम कोशिशें सबको पाने की सरेआम हुईक्या कहूँ वो वादा-ए-दस्तूर  निभा न सके&n...
kuldeep thakur
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शूल की चुभन,बहुत पीड़ा देती है,पर शायदउतनी पीडा नहीं,जितनी फूल की चुभन,....देती है....वो बेटेभूल चुके हैं  सब कुछअपने  मां-बाप को भी,उन के सप नों को भी,जिन्हे  याद है अब ...केवल नशा ...जो माएं मांगती रही दुआलंबी आयु कीअपने बेटों  के लिये आज वो भ...
 पोस्ट लेवल : आवाहन नशा बदनसीब बच्चे
Kajal Kumar
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