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संजीव तिवारी
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छत्तीसगढ़ के लोकनाट्य नाचा में एक गम्मत खेल&#2366...
अमितेश कुमार
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हबीब तनवीर के ऐतिहासिक चरनदास चोर का नाम लेते ही गोविंदराम निर्मलकर का ध्यान आता है. ये इसी भूमिका के लिये थे लेकिन इन्होंने मंच पर कई भूमिकाएं निभाईं. मंच का यह चरनदास चोर जीवन में भी सत्ता और समाज के हाथों हार गया. वे कोई महानगरीय अभिनेता नहीं थे इसीलिये प्रगतिशी...
विजय राजबली माथुर
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 Satya Narayan24-01-2014  महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों का आखिर कारण क्‍या है ?: जो भी बिक सके, उसे बेचकर मुनाफा कमाना पूँजीवाद की आम प्रवृत्ति है। पूँजीवादी समाज के श्रम-विभाजन जनित अलगाव ने समाज में जो ऐन्द्रिक सुखभोगवाद, रुग्ण- स्वच्छन्द यौना...
ललित शर्मा
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संजीव तिवारी
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1 श्री चिन्ताराम यदु राउत नाचा मु.पो. मोपर, भाटापारा, रायपुर  2 श्री चिन्ताराम यदु राउत नाचा मु.पो. मोपर, भाटापारा, रायपुर 3 श्री विनय यादव राउत नाचा मु.पो. नांदघाट, दुर्ग 4...
 पोस्ट लेवल : राउत नाचा
संजीव तिवारी
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पिछले दिनों रायपुर के एक प्रेस से पत्रकार मित्र का फोन आया कि संस्‍कृति विभाग द्वारा राजधानी में पहले व तीसरे रविवार को मुख्‍यमंत्री निवास के बाजू में नाचा - गम्‍मत का एक घंटे का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है इस पर आपकी राय क्‍या है तो मैंने छूटते ही कहा था कि छत...
 पोस्ट लेवल : नाचा
संजीव तिवारी
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आज के सांध्‍य दैनिक में इस समाचार को पढ़कर मैं सकते में आ गया अभी दो दिन पहले ही हबीब तनवीर जी की पुण्‍यतिथि पर साथी ब्‍लॉगरों नें पोस्‍ट लगाया और भाइयों नें टिप्‍पणियां भी की और ताने भी मारे कि हबीब जी की पुण्‍य तिथि छत्‍तीसगढ़ को याद रखना चाहिए. यद्धपि भाईयों को...
संजीव तिवारी
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देवासुर संग्राम में देवों के विजय के लिए दधीचि ने हड्डीयों का दान दिया था । वैसे ही छत्तीसगढ़ी लोकमंच की अंत्यन्त लोकप्रिय विधा नाचा के लिए दुलारसिंह साव मदराजी ने भी इसी परंपरा में अपना सर्वस्व होम कर दिया था । लोकमंच के संवर्धनकर्त्ता दाऊओं में दुलारसिंह साव मदर...
संजीव तिवारी
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द्विअर्थी साखियां - नाचा में यदा-कदा द्विअर्थी साखी का प्रयोग किया जाता है। सुनने में अश्लील लगते हैं किंतु भवार्थ स्पष्ट  करने पर अश्लीलता की परिधि से बाहर आ जाते हैं। नाचा में इस तरह की साखियां पहले कही जाती थी किंतु अब इसका प्रयोग नहीं किया जाता, अश्लीलता व...
संजीव तिवारी
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कृषि संबंधी साखियां - गांव के लोगों का प्रमुख कार्य कृषि ही है, नाचा के कलाकार भी स्वत: कृषक और मजदूर होते हैं। तब भला अपने कृषि कर्म में काम आने वाली वस्तुओं को वे कैसे भूल सकते हैं? कृषक जीवन की दिनचर्या और कृषि कर्म भी साखी और पहेली की विषय सामग्री बनते हैं-आगू...