ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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एक समय वो भी रहाजब हर चीज़ कस कर पकड़ने की आदत थीचाहे अनुभूतियाँ होंपल होंरिश्ते होंया कोई मर्तबान हीमुट्ठियाँ भिंची रहतीजब स्थितियाँ बदलतींऔर चीज़े हाथ से फिसलतीतो नाखूनों में रह जाती किरचनेंस्मृतियों कीलांछनों कीछटपटाहटों कीकांच कीअजीब सा दंश थाकि मैं दिन भर नाखू...
Yashoda Agrawal
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ग़ैरों को अपना बनाने का हुनर है तुममेंकभी अपनो को अपना बना कर देखो ना..ग़ैरों का मन जो घड़ी में परख लेते होकभी अपनो का मन टटोल कर देखो ना..माना कि ग़ैरों संग हँसना मुस्कुराना आसां हैकभी मुश्किल काम भी करके देखो ना..कामकाजी बातचीत ज़रूरी है ज़माने सेकभी अपनो संग ग़ै...
Yashoda Agrawal
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सुनो लड़कियोंअपने पैरों का खास ख्याल रक्खो..देखो एड़ियाँ कटी फटी न होंनाखून ठीक आकार लिए होंबढ़िया नेल पॉलिश लगी हो..इसलिये भी कि इन्ही से दौड़ना हैअपने सपनो के पीछेअपने अपनो के पीछेऔर सबको पीछे कर के सबके आगेतो इन्हें सर पर बैठा कर रखना होगा..और इसलिए भी किव्यस्तता कि...
 पोस्ट लेवल : फेसबुक निधि सक्सेना
Yashoda Agrawal
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नहीं ज़िंदगीयूँ नग्न न चली आया करो कुरूप लगती हो बेहतर है कि कुछ लिबास पहन लोकि जब शिशुओं के पास जाओतो तंदुरुस्ती का लिबास ओढ़ो..जब बेटियों के पास जाओतो यूँ तो ओढ़ सकती हो गुलाबी पुष्पगुच्छ से सजी चुनरीया इंद्रधनुषी रंगों से सिली क़ुर्तीपरंतु सुनो तु...
Yashoda Agrawal
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बारिश खुली नही है अभीअभी तो बंधे पड़े हैं बादलहवाओं का बहकना बाकी है अभीअभी सूखा पड़ा है मन..कुछ ही बूंदे गिरी हैं अभीकि अभी तो सूरज धुला भी नहींकोई सांझ नहाई भी नहीं पोखर भरे भी नहीं बच्चे भीगे भी नहीं रात गुनगुनाई भी नहीं झींगुर बोले भी नहीं ..ह...
Yashoda Agrawal
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मेरी ही करुणा परटिकी है ये सृष्टि ..मेरे ही स्नेह से उन्मुक्त होते हैं नक्षत्र..मेरे ही प्रेम सेआनंद प्रस्फुटित होता है ..मेरे ही सौंदर्य पर डोलता है लालित्य ..और मेरे ही विनय पर टिका है दंभ..कि प्रेम स्नेह और करुणा का अक्षय पात्र हूँ मैं जितना...
Yashoda Agrawal
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बचपन से ही मुझे पढ़ाये गए थे संस्कारयाद कराई गईं मर्यादाएँहदों की पहचान कराई गई सिखाया गया बहनाधीरे धीरे अपने किनारों के बीचतटों को बचाते हुए..मन की लहरों को संयमित रख कर दायित्व ओढ़ कर बहना था आवेग की अनुमति न थी मुझेअधीर न होना था हर हाल श...
Yashoda Agrawal
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स्त्री सुख की खोज मेंऔर प्रेम की चाह मेंमरीचिका की मृगी की तरह भागती रहती है पिता के घर से पति के घरपति के घर से बेटे के घर ..पुनः पुनः लौटने को ..हर जगह से बटोरती हैं क़िस्से जिन्हें याद कर अतीत में झाँकती रहती है..न जाने क्यों हर वर्तमान अतीत से ज़...
Yashoda Agrawal
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राम ध्यान  हैशान्त स्थिरमौन गंभीरदिव्य आलोकित अंधकार में प्रकाश भरा स्मित ..कृष्ण कीर्तन  हैंनाचते गाते आनंद से छलछलाते उन्मुक्तसुखद सरल ..ध्यान करो चाहे कीर्तनस्वयं से मिलन तय है कि राम और कृष्ण हमारे भीतर ही तो हैं...-निधि सक्सेना
Yashoda Agrawal
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बारिशें थोड़ी जमो अभीबादल थोड़े थमो अभीमुस्कुराहटें थोड़ी तिरो अभीहँसी थोड़ी झरो अभीअनुभूतियाँ थोड़ी रुको अभीउम्मीदें थोड़े ठिठको अभीरंग थोड़े ठहरो अभीउमंग थोड़ा ठौर अभीप्रेम थोड़ा संग अभी!!कि अब तक बहुत होश में थीअब कुछ बेख्याल तो हो लूँजिन्दगी के सिरहाने बैठउसे थोड़ा जी तो...