ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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PRABHAT KUMAR
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बहुत दिन हुआ शायद लिखे मुझे कुछ नया।लिखा भी तो कुछ रचनात्मक, सृजनात्मक और भावनात्मक न लिखा।जो भी रहा शायद पन्ने पर न उतर सका।आज लिख रहा हूँ फिर से तुम्हें क्योंकि तुम्हें लिखकर मैं इन सबको जाहिर कर सकता हूँ।*******नींद जब टूट जाती है, पंखे जब घूमने बंद हो जाते हैंप...
 पोस्ट लेवल : नींद जब टूट जाती है
Kavita Rawat
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विजय राजबली माथुर
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शिवम् मिश्रा
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सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।विश्व नींद दिवस (अंग्रेज़ी: World Sleep Day) प्रत्येक वर्ष 'मार्च विषुव' (21 मार्च) से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है। नींद के महत्त्व को रेखांकित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद जरूरी है...
Kailash Sharma
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कुछ दर्द अभी तो सहने हैं,कुछ अश्क़ अभी तो बहने हैं।मत हार अभी मांगो खुद से,मरुधर में बोने सपने हैं।बहने दो नयनों से यमुना,यादों को ताज़ा रखने हैं।नींद दूर है इन आंखों से,कैसे सपने अब सजने हैं।बहुत बचा कहने को तुम से,गर सुन पाओ, वह कहने हैं।कुछ नहीं शिकायत तुमने की,यह...
विजय राजबली माथुर
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Sanjay  Grover
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ग़ज़लजब खुल गई पहेली, तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे तो बेईमानी .. में हम हैं पूरे डूबेमाइक हो गर मुख़ातिब, बातें बनाना आसांजो तुम तलक है पहुंचा, उन तक भी पहुंच...
लोकेश नशीने
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【1】जब भी किया नींद नेतेरे ख़्वाबों का आलिंगनऔर आँखों ने चूमा हैतेरी ख़ुश्बू के लबों कोतब मुस्कुरा उट्ठा हैमेरे ज़िस्म का रोंया रोंयाचित्र साभार- गूगल【2】न जानेकितनी ही रातें गुजारी है मैंनेतेरे ख़्यालों मेंउस ख़्वाब के आगोश मेंजिसकी ताबीर* हो नहीं सकतीअक्सर आ बैठते हैं...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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बचपन में समय परआती थी  नींद,कहानी दादा-दादी की लाती थी नींद। अब आँखों मेंकिसी की तस्वीर बस गयी है,नींद भी क्या करतीकहीं और जाकर बस गयी है।#रवीन्द्र सिंह यादव