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sanjiv verma salil
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सॉनेट लता*लता ताल की मुरझ सूखती।काल कलानिधि लूट ले गया।साथ सुरों का छूट ही गया।।रस धारा हो विकल कलपती।।लय हो विलय, मलय हो चुप है।गति-यति थमकर रुद्ध हुई है।सुमिर सुमिर सुधि शुद्ध हुई है।।अब गत आगत तव पग-नत है।।शारदसुता शारदापुर जा।शारद से आशीष रही पा।शारद माँ क...
sanjiv verma salil
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बघेली सरस्वती वंदना डॉ. नीलमणि दुबे शहडोल *को अब आइ सहाइ करै,पत राखनहार सरस्सुति मइया,तोर उजास अॅंजोर भरै,उइ आइ मनो रस-रास जुॅंधइया!बीन बजाइ सॅंभारि करा,हमरे तर आय न आन मॅंगइया,भारत केर उबार किहा,महॅंतारि बना मझधार क नइया!!नीलमणि दुबेदिनांक २६-०९-२०१९http://divyana...