ब्लॉगसेतु

अर्चना चावजी
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आज २४ जुलाई फिर से सामने आ खड़ी हुई है -कुछ याद चित्रों के सहारे 
 पोस्ट लेवल : सुनील बस यूंही
शिवम् मिश्रा
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सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा नमस्कार।सुनील दत्त सुनील दत्त (अंग्रेज़ी: Sunil Dutt, जन्म- 6 जून, 1929 गाँव खुर्दी, पंजाब (पाकिस्तान); मृत्यु- 25 मई, 2005, मुंबई) भारतीय सिनेमा में एक ऐसे अभिनेता थे जिनको पर्दे पर देख एक आम हिन्दुस्तानी अपनी ज़िंदगी की झलक देखता थ...
sanjiv verma salil
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कविता: अहसास * 'अहसास' तो अहसास है वह छोटा-बड़ा या पतला-मोटा नहीं होता.'अनुभूति' तो अनुभूति है उसका मजहब या धर्म नहीं होता.'प्रतीति' तो प्रतीति है उसका दल या वाद नहीं होता. चाहो तो 'फीलिंग' कह लो लेकिन कहने से पहले 'फील' करो.किसी के घाव को हील करो. कभी 'स्व' से आरम्...
Yashoda Agrawal
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दूर क्षितिज में फटते बादलों में से उभरता- यह सुनहरा प्रकाश - ज्ञान किरण,भरी प्रश्नों साथ।किसी पुस्तक में न छपे उत्तर इसके,न किये किसी ने प्रश्न मुझ से।यह अन्दर से उभरे प्रश्न,अन्तकरण में ही छिपे उत्तर इनके,सिमित बुद्धि सहन कर पायेगी-क्या उत...
सुनील  सजल
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लघु कथा - जवाबशहर के फ़्लैट में ब्लू फिल्म बनाये जाने की सूचना मिली ।पुलिस ने छापामार कर एक लड़की व दो लड़कों को संदिग्ध हालात सहित फिल्मांकन करने वाली पूरी टीम को गिरफ्तार किया ।थाने में ।"क्यों री, तुझे शर्म नहीं आती इन आवारा लड़कों के साथ अपनी शर्मो-हया बेचकर नंगी फ...
सुनील  सजल
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लघुकथा - संतुष्ट सोच नगर के करीब ही सड़क से सटे पेड़ पर एक व्यक्ति की लटकती लाश मिली । देखने वालों की भीड़ लग गयी ।लोगों की जुबान पर तर्कों का सिलसिला शुरू हो गया ।किसी ने कहा-"लगता है साला प्यार- व्यार  के चक्कर में लटक गया ।""मुझे तो गरीब दिखता है ।आर्थिक...
सुनील  सजल
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लघुकथा- समर्पणवह छः माह बाद अपने गाँव लौटा था । मजदूरी के चक्कर में पूरे परिवार सहित पलायन कर जबलपुर चला गया था । " रमलू कब लौटा ?" किसी ने उससे पूछा ।" आज ही गुरूजी ।" उसका उत्तर ।"एक बात पूछ सकता हूँ "। गुरूजी का प्रश्न ।"क्यों नहीं गुरूजी ।बेशक पूछिए ।"रमलू...
Bhavna  Pathak
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प्यारे नन्हे अहान के लिए---------------------------ओ नन्हे मुन्ने मतवालेजरा इधर भी नजर घुमा लेमालामाल हमें तू कर देमधुर मधुर मुस्कानों वालेखुशियों का तू लगे समंदरप्यारे तू है मस्त कलंदरअचरज से देखे तू सबकुछकितना कौतूहल है अंदरअजब अजब के खेल दिखाताओ सपनीली आखों वाले...
सुनील  सजल
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लघु व्यंग्य -अंकुशगर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों के एक समूह ने अपनी अधीक्षिका के खिलाफ विद्रोह कर दिया ।वे शिकायत हेतु उच्च अधिकारी के पास पहुंची ।उनकी अधीक्षिका उन  पर अंकुश पर अंकुश लगाती हैं ।पीना-खाना, मौज-मस्ती,, घूमने -फिरने और लड़कों के संग दोस्ती पर अंगुलियां...
Akhilesh Karn
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फिल्म : हो गइनी पागल दीवानागायक: सुनील छैला बिहारीगीतकार: सुनील छैला बिहारीसंगीतकार : धनंजय मिश्रातोहके बनाइब हम आपन दुल्हनियातोहके बनाइब तोहके बनाइब हम आपन दुल्हनियाआम तर मिलिह मोर सजनियाआम तर मिलिह मोर सजनियाआम तर मिलिह मोर सजनियातोहके बनाइब हम आपन दुल्हनिया...