ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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लाल, हरा, नीला, पीला, निखर रहे हैं रंग।मस्तानों की टोलियाँ,  फ़ाग में हुए मलंग।।भर पिचकारी घूम रहे,  बच्चे  चारों ओर।अनायास  बौछार  से,  राहगीर  सब दंग।।स्वप्नपरी के रूप में,  झूमें  हैं  चाचा आज।चाची गुझिया खिला रही...
Akhilesh Karn
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गायक : सुनील मल्लिक व साथीफिल्म: पारंपरिक होली गीत परदेशिया के चिटि्टया लिखावे गोरिया परदेशियापरदेशिया हो  परदेशिया हो  परदेशिया हो परदेशिया के चिटि्टया लिखावे गोरिया परदेशियापरदेशिया के चिटि्टया लिखावे गोरिया परदेशिया जब परदेशिया नगर बीचे आएजब परद...
कुमार मुकुल
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साहित्‍य अकादमी युवा पुरस्‍कार से पुरस्‍कृत उपन्‍यास 'डार्क हॉर्स' नीलोत्‍पल मृणाल की रोचक और हिंदी पद्टी के अपनी तरह के सेंस ऑफ हयूमर से भरपूर है। यह गांव-कस्‍बे से आईएएस की तैयारी करने दिल्‍ली पहुंचे लड़कों की कहानी है। उपन्‍यास के अधिकांश पात्र इस तैयारी के अंत...
अर्चना चावजी
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आज २४ जुलाई फिर से सामने आ खड़ी हुई है -कुछ याद चित्रों के सहारे 
 पोस्ट लेवल : सुनील बस यूंही
शिवम् मिश्रा
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सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा नमस्कार।सुनील दत्त सुनील दत्त (अंग्रेज़ी: Sunil Dutt, जन्म- 6 जून, 1929 गाँव खुर्दी, पंजाब (पाकिस्तान); मृत्यु- 25 मई, 2005, मुंबई) भारतीय सिनेमा में एक ऐसे अभिनेता थे जिनको पर्दे पर देख एक आम हिन्दुस्तानी अपनी ज़िंदगी की झलक देखता थ...
sanjiv verma salil
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कविता: अहसास * 'अहसास' तो अहसास है वह छोटा-बड़ा या पतला-मोटा नहीं होता.'अनुभूति' तो अनुभूति है उसका मजहब या धर्म नहीं होता.'प्रतीति' तो प्रतीति है उसका दल या वाद नहीं होता. चाहो तो 'फीलिंग' कह लो लेकिन कहने से पहले 'फील' करो.किसी के घाव को हील करो. कभी 'स्व' से आरम्...
Yashoda Agrawal
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दूर क्षितिज में फटते बादलों में से उभरता- यह सुनहरा प्रकाश - ज्ञान किरण,भरी प्रश्नों साथ।किसी पुस्तक में न छपे उत्तर इसके,न किये किसी ने प्रश्न मुझ से।यह अन्दर से उभरे प्रश्न,अन्तकरण में ही छिपे उत्तर इनके,सिमित बुद्धि सहन कर पायेगी-क्या उत...
सुनील  सजल
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लघु कथा - जवाबशहर के फ़्लैट में ब्लू फिल्म बनाये जाने की सूचना मिली ।पुलिस ने छापामार कर एक लड़की व दो लड़कों को संदिग्ध हालात सहित फिल्मांकन करने वाली पूरी टीम को गिरफ्तार किया ।थाने में ।"क्यों री, तुझे शर्म नहीं आती इन आवारा लड़कों के साथ अपनी शर्मो-हया बेचकर नंगी फ...
सुनील  सजल
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लघुकथा - संतुष्ट सोच नगर के करीब ही सड़क से सटे पेड़ पर एक व्यक्ति की लटकती लाश मिली । देखने वालों की भीड़ लग गयी ।लोगों की जुबान पर तर्कों का सिलसिला शुरू हो गया ।किसी ने कहा-"लगता है साला प्यार- व्यार  के चक्कर में लटक गया ।""मुझे तो गरीब दिखता है ।आर्थिक...
सुनील  सजल
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लघुकथा- समर्पणवह छः माह बाद अपने गाँव लौटा था । मजदूरी के चक्कर में पूरे परिवार सहित पलायन कर जबलपुर चला गया था । " रमलू कब लौटा ?" किसी ने उससे पूछा ।" आज ही गुरूजी ।" उसका उत्तर ।"एक बात पूछ सकता हूँ "। गुरूजी का प्रश्न ।"क्यों नहीं गुरूजी ।बेशक पूछिए ।"रमलू...