ब्लॉगसेतु

अर्चना चावजी
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अंतिम दिन!अर्चना चावजी·WEDNESDAY, DECEMBER 2, 2015 2/12/1996........2/12/201519 साल...पर उस दिन को ,उस पल को भूलना आसान नही,भुलाना भी क्यों? और कैसे? जबकि अंतिम सांस की आहट और खड़खड़ाहट गूंजती है अब भी कानों में और ये आँखे बंद होकर भी नहीं होतीमहसूसती हूँ आज भीअंतिम...
रणधीर सुमन
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भारतीय जनसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय का रहस्यमय परिस्तिथियों में शव 11 फरवरी 1968 में उत्तर प्रदेश के मुग़लसराय रेलवे स्टेशन पर मिला था. उनके परिवारजनों ने लगभग 47-48 साल बाद उनकी संदिग्ध परिस्तिथियों में हुई मौत की जांच कराने की मांग की है. उपाध्...
Shachinder Arya
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'धर्मनिरपेक्षता' की एक व्याख्या:"नेहरू ने धर्मनिरपेक्षता को अन्य धर्मों का स्थान लेने वाले नागरिक धर्म की तरह कभी नहीं लिया। वे धर्म को मिला कर सभी भारतवासियों पर धर्मनिरपेक्ष पहचान का ठप्पा लगाने और इस तरह समाज पर एक नई नैतिकता थोपने के पक्ष में कतई नहीं थे। उन्हे...
Ravindra Prabhat
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प्यार कभी क़र्ज़ नहीं होता जिसे चुकाया जा सके या जिसका कोई हिसाब किताब हो !प्यार दिशा निर्मित करती हथेली है जो मुट्ठी को थामे रहती है कभी पकड़ मजबूत कभी प्रार्थनाएँ मजबूत पास हो या दूर दुआओं के धागे की तरह बाँधे रखता है !कोई भी...
Akhilesh Karn
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गायक : सुनील छैला बिहारी व अनुराधा पौडवालविवाह गीत, बज्जिकाबाबा जुअबा खेलन कै कहारे गेल्हो नाबाबा जुअबा खेलन कै कहारे गेल्हो नाबाबा जुअबे में कथि कै हारि गेल्हो नाबाबा जुअबे में कथि कै हारि गेल्हो नाबेटी जुअबा खेलन भागलपुर गेलियो नाबेटी जुअबा खेलन भागलपुर गेलियो ना...
prabhat ranjan
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विश्वपुस्तक मेले में हिंदी प्रकाशकों के हॉल में सबसे अधिक चर्चा थी ईबुक की. इस चर्चा के दो कारण थे. एक तो ईबुक के सबसे बड़े प्लेटफोर्म न्यूजहंट की मौजूदगी के कारण, जिनके मोबाइल ऐप के कारण अपने फोन में सस्ती कीमत पर आप अपनी मनपसंद किताबों को डाउनलोड कर सकते हैं. लेकि...
prabhat ranjan
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आज विश्व पुस्तक मेला का अंतिम दिन है. इस बार बड़ी अजीब बात है कि हिंदी का बाजार बढ़ रहा है दूसरी तरफ बड़ी अजीब बात यह लगी कि इस बार किताबों को लेकर प्रयोग कम देखने में मिले. प्रयोग होते रहने चाहिए इससे भाषा का विस्तार होता है. लेकिन इस पुस्तक मेले में जिस किताब ने आइड...
अमितेश कुमार
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मनुष्य की भीतरी प्रवृतियां उसके व्यक्तित्व पर समय मिलते ही हावी होती हैं. अनुशासन के बावजुद इन आवेगों का संचरण किसी तर्क प्रणाली का अनुसरण नहीं करता बल्कि मनुष्य ही उनका अनुसरण करने लगता है. सुनील शानबाग निर्देशित प्रस्तुति ‘क्लब डिजायर’ ऐसे ही आवेगों के द्वंद्व और...
राजीव कुमार झा
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अलेक्जेंड्रा डेविड नील (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); तिब्बत आज भी रहस्यमय और अलौकिक विद्याओं का केंद्र माना जाता है.भारतीय योगी भी अपनी साधना के लिए हिमालय के दुर्गम और सामान्य मनुष्य की पहुंच के बाहर वाले क्षेत्रों को ही चुनते हैं.भारत और विश...
prabhat ranjan
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हिंदी किताबों की दुनिया में पाठकों से जुड़ने की आकांक्षा पहले से बढ़ी है, इस दिशा में पहले भी प्रयास होते रहे हैं, लेकिन इस साल इस दिशा में कुछ लेखकों, प्रकाशकों ने निर्णायक कदम उठाये. जिसके बाद यह कहा जा सकता है कि आने वाले सालों में हिंदी किताबों की दुनिया वही नहीं...