ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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कहते हैं कि जो आया है वो जायेगा ही मगर कोई आने वाला बजाय जाने के विलुप्त ही हो जाये तो? क्या ऐसा भी हो सकता है कि आने वाला विलुप्त हो जाये? यदि ऐसा होता भी है तो वह विलुप्त क्यों हुआ? यदि खुद अपनी मर्जी से विलुप्त नहीं हुआ तो फिर किसने विलुप्त करवाया? उसके खुद विलु...
शिवम् मिश्रा
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दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की घृणित प्रथा के खात्मे के लिए चले निर्णायक आंदोलन के अगुवा नेल्सन मंडेला के जीवन में महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के रूप में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अलग-अलग विचारधाराओं वाले दो पुरोधाओं की सोच का अनोखा संगम देखा...
शिवम् मिश्रा
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 " 'मृतक 'ने तुमसे कुछ नहीं लिया | वह अपने लिए कुछ नहीं चाहता था | उसने अपने को देश को समर्पित कर दिया और स्वयं विलुप्तता मे चला गया |"- महाकाल "महाकाल" को १२२ वीं जयंती पर हम सब का सादर नमन ||आज़ाद हिन्द ज़िंदाबाद ... नेता जी ज़िंदाबाद ||जय हिन्द !!!
kumarendra singh sengar
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व्यावहारिक रूप से हमने भले ही आज़ादी सन 1947 में पाई हो मगर हम एक तरह से  30 दिसंबर 1943 को ही आजाद हो गए थे. यह दिन शायद बहुत से देशवासियों को स्मरण भी न हो मगर सत्य यही है कि इसी दिन इस देश के एक क्रांतिकारी बेटे ने स्वतंत्र भारत के रूप में राष्ट्र ध्वज फहराय...
kumarendra singh sengar
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21 अक्टूबर का दिन देश के लिए ऐतिहासिक दिन है. इसे महज इसलिए याद नहीं किया जाना चाहिए कि इस दिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया. यह आज़ाद देश में पहली बार है जबकि 21 अक्टूबर को किसी प्रधानमंत्री ने लाल किले पर तिरंगा फहराया....
शिवम् मिश्रा
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21 अक्तूबर 1943 के दिन सिंगापुर के कैथी सिनेमा हॉल में नेताजी “आरज़ी हुकुमत-ए-आज़ाद हिन्द” की स्थापना की घोषणा करते हैं। स्वाभाविक रुप से नेताजी स्वतंत्र भारत की इस अन्तरिम सरकार (Provisional Government of Free India) के प्रधानमंत्री, युद्ध एवं विदेशी मामलों...
kumarendra singh sengar
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पेट भरो आन्दोलन की संकल्पना के साथ डॉ० राजीव श्रीवास्तव ने एक पुनीत कार्य आरम्भ किया अनाज बैंक का. जैसा सुनने में लगा ठीक वैसा ही एहसास देखने में भी होता है. बैंक जैसी प्रक्रिया, बैंक जैसा लेन-देन, बैंक जैसा प्रबंधन, बैंक जैसा दस्तावेजीकरण. आम बैंकों और इस बैंक में...
शिवम् मिश्रा
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 " 'मृतक 'ने तुमसे कुछ नहीं लिया | वह अपने लिए कुछ नहीं चाहता था | उसने अपने को देश को समर्पित कर दिया और स्वयं विलुप्तता मे चला गया |"- महाकाल "महाकाल" को १२१ वीं जयंती पर हम सब का सादर नमन ||आज़ाद हिन्द ज़िंदाबाद ... नेता जी ज़िंदाबाद ||जय हिन्द !!!
kumarendra singh sengar
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इस देश में ही क्या, समूचे विश्व में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के अतिरिक्त शायद ही कोई और होगा जिसकी मृत्यु पर आज तक संदेह बना हुआ है. इसको एक तरह की सरकारी मान्यता देने के बाद कि नेता जी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को एक विमान दुर्घटना में हो गई थी, अधिसंख्यक लोगों द्वा...
शिवम् मिश्रा
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21 अक्तूबर 1943 के दिन सिंगापुर के कैथी सिनेमा हॉल में नेताजी “आरज़ी हुकुमत-ए-आज़ाद हिन्द” की स्थापना की घोषणा करते हैं। स्वाभाविक रुप से नेताजी स्वतंत्र भारत की इस अन्तरिम सरकार (Provisional Government of Free India) के प्रधानमंत्री, युद्ध एवं विदेशी मामलों...