ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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जो लोग "एक विधान, एक निशान" की बातें करते हुए उत्साह और उन्माद से भर कर इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हैं वे अर्द्धसत्य ही नहीं, भ्रामक सत्य का प्रचार कर रहे हैं। एकता थोपी हुई नहीं होती और अगर थोपी जाती है तो वह एकता नहीं होती।थोपी गई एकता भ्रम का एक आवरण रचती है जि...
kumarendra singh sengar
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राजनैतिक घोटालेबाजों का बेशर्मी से अपनी सफाई देते रहना; राजनैतिक हत्यारों का सीना तानकर समाज में घूमते रहना; रिश्तेदारों द्वारा रिश्तों की गरिमा को तार-तार करना, युवा पीढ़ी द्वारा आधुनिकता के वशीभूत नशे की गिरफ्त में चले जाना; एक पल में शानोशौकत, पद, प्रतिष्ठा पाने...
kumarendra singh sengar
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शिक्षा समाप्ति के बाद दिमाग में प्रशासनिक सेवा में जाने का कीड़ा कुलबुला रहा था. उसके साथ-साथ खुद को आर्थिक आधार पर खड़ा करने की सोच भी काम कर रही थी. नब्बे के दशक में बहुत सारी स्थितियाँ सहायक सिद्ध होती थीं तो बहुत सी स्थितियाँ विपरीत दिशा में काम करती थीं. उनकी सह...
संतोष त्रिवेदी
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अचानक एक साथ दो अंतरात्माएँ प्रकट हो गईं।एक को भ्रष्टाचार की आवाज़ सुनाई दी तो दूसरी को हत्या के आरोप की।अन्तरात्माओं की ख़ास बात यह है कि वे किसी के कहने पर नहीं आतीं।ऐन मुफ़ीद वक़्त पर वे आकाशवाणी करने लगती हैं।महागठबंधन ‘ब्रेक’ हुआ तो अंदरूनी आत्माओं ने मोर्चा स...
roushan mishra
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बॉर्डर फिल्म के अंत में एक गाना था "मेरे दुश्मन , मेरे भाई"युद्ध पर बनी इस फिल्म में ये गाना युद्ध की खिलाफत करता हुआ शान्ति की वकालत करता है। उस समय देश देशभक्ति को लेकर इतना संवेदनशील नहीं हुआ था   नहीं तो लोग इस गाने के रचयिता, गायक और फिल्म के निर्मात...
roushan mishra
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माननीय मंत्री महोदया , महाश्वेता देवी निश्चित रूप से हमारे समय की महान हस्तियों में से थीं। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए सिर्फ भावना की जरूरत थी अगर आपके कानों तक वे आवाजें पहुँचती हैं जिनका दर्द वे उठाती रहती थीं , अगर आपके हृदय उसे महसूस कर सकता है तो कोई फर्क नह...
 पोस्ट लेवल : छोटी सी बात नैतिकता
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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1 अगस्त 2015 : जब तक आप प्रयत्न करना बंद न कर दें, अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता है. 2 अगस्त 2015 : क्या आपको जीवन रूपी वृक्ष का ज्ञान है या आप केवल इसकी टहनियों के नीचे ही खड़े हैं?3 अगस्त 2015 : धन कमाना बुरा नहीं है, धन का दुरूपयोग करना बुरा है.4 अगस्...
Ramesh pandey
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शिक्षक समाज का दर्पण होता है। शिक्षक छात्र को जिस सांचे में ढालता है, वैसे ही उस समाज का निर्माण होता है। किसी समाज के उत्थान और पतन का इतिहास उस समाज के शिक्षक ही तय किया करते हैं। अगर शिक्षक नैतिक विहीन हो जाए तो वह समाज कैसा होगा? शायद इसीलिए हमेशा से महापुरुषों...
 पोस्ट लेवल : नैतिकता
kumarendra singh sengar
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क्रिकेट का खेल अब धन का खेल बन चुका है, विवादों का, घोटालों का, भ्रष्टाचार का खेल बन चुका है. ऐसा कोई एक-दो उदाहरणों से नहीं वरन आये दिन होते नए-नए खुलासों से स्पष्ट होता रहा है. कभी क्रिकेट खेलने और देखने के परम शौकीनों में शामिल माने जाने वालों में हम भी रहे और...
 पोस्ट लेवल : खेल नैतिकता क्रिकेट
kumarendra singh sengar
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शायद सामाजिक स्थिति वर्तमान में समझने-समझाने वाली मुद्रा से अनियंत्रित होकर सिर्फ देखते रहने की हालत में आ गई है. आधुनिकता के, नई सदी के, इक्कीसवीं सदी के नाम पर बनाये गए विभिन्न वैभवशाली विशेषणों के मध्य संस्कार, संस्कृति, सदाचार, नैतिकता आदि का लगातार पतन देखने...