ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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त्वरित प्रतिक्रियामहारास और न्यायालय*महारास में भाव था, लीला थी जग हेतु.रसलीला क्रीडा हुई, देह तुष्टि का हेतु..न्यायालय अँधा हुआ, बँधे हुए हैं नैन.क्या जाने राधा-किशन, क्यों खोते थे चैन?.हलकी-भारी तौल को, माने जब आधार.नाम न्याय का ले करे, न्यायालय व्यापार..भारहीन स...
 पोस्ट लेवल : रास न्यायालय
विजय राजबली माथुर
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Shyam Meera SinghJanuary 31 at 1:40 PM'मीडिया के बाद 'न्यायपालिका' का 'शव' भी आने के लिए तैयार है. इस पूरी क्रोनोलॉजी पर आपका ध्यान नहीं गया होगा~●12 जून, 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस देश की सबसे ताकतवर महिला को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया!  &n...
Sanjay  Grover
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ऐसे मौक़े पर किसी एक पक्ष के बारे में रचना लिख दो, अकसर मशहूर हो जाती है।किसीने लिख दिया कि हम पेपर नहीं दिखाएंगे।बिलकुल ठीक है, नागरिकता वगैरह के पेपर की मांग से ग़रीबों और दूसरे कई लोगों को बहुत मुश्क़िल होगी। वैसे भी, क्या गारंटी है जो यहां का निकलेगा वो अच्छा भी न...
Sanjay  Grover
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हमारे घर की बिजली अकसर ख़राब हो जाती थी।कई बार तो एक-एक हफ़्ते ख़राब रहती थी।जबकि पड़ोस के बाक़ी घरों की बिजली आ रही होती थी।उसका कारण था। हमारे पिताजी के संबंध और आना-जाना वैसे तो बहुत लोगों से था मगर न तो किसी दबंग और बदमाश सेे संबंध रखते थे न ख़ुद बदमाशी करते...
 पोस्ट लेवल : न्याय समझ society समाज justice
Pratibha Kushwaha
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इंडियन जुडिशल रिपोर्ट-2019 इस माह आई है। यूं तो यह नागरिकों और उनके न्यायक्षेत्र से संबंधित है, पर इसका एक आवश्यक भाग पुलिस भी है। जिस पर नागरिकों की सुरक्षा भार और उत्तरदायित्व होता है। एक अच्छी पुलिस आम नागरिकों को न केवल सुरक्षा उपलब्ध कराती है, बल्कि उसके साथ ह...
संतोष त्रिवेदी
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इन दिनों ‘लोकतंत्र’ और ‘सत्य’ लगातार खबरों में बने हुए हैं।इससे इस बात की पुष्टि भी होती है कि ये दोनों अभी तक जीवित हैं।यह इस सबके बावजूद हुआ जबकि हर दूसरे दिन ‘लोकतंत्र की हत्या’ होने की मुनादी पिटती है।पर यह सशक्त लोकतंत्र का कमाल ही है कि वह अगले दिन सही-सलामत...
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--न्याय मिला श्री राम को, न्यायालय से आज।अब मन्दिर निर्माण का, पूरा होगा काज।।-- दोनें पक्षों को मिला, उनका अब अधिकार।मन्दिर-मस्जिद को दिया, धरती का उपहार।।-- भव्य बने मन्दिर वहाँ, मस्जिद आलीशान।अलग-अलग भू पर बने, पूजा-सदन महान।। --धर्मों के दरम्...
अजय  कुमार झा
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पिछले कुछ समय से न्यायपालिका से जिस तरह की खबरें निकल कर सामने आ रही हैं वो कम से कम ये तो निश्चित रूप से ईशारा कर रही हैं कि , न्यायपालिका की प्रतिबद्धता और जनता के बीच बना हुआ उनके प्रति विश्वास अब पहले जैसा नहीं रह पायेगा | रहे भी कैसे एक के बाद एक नई नई घटनाएं...
दिनेशराय द्विवेदी
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सबसे बुरा तब लगता है जब जज की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने इजलास में किसी मजदूर से कहता है कि "फैक्ट्रियाँ तुम जैसे मजदूरों के कारण बन्द हुई हैं या हो रही हैं"।40 साल से अधिक की वकालत में अनगिन मौके आए जब यह बात जज की कुर्सी से मेरे कान में पड़ी। हर बार मेरे कानों स...
अजय  कुमार झा
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अगर आपका कोई भी मुकदमा/वाद अदालत में लंबित है तो आप अब उसकी जानकारी घर बैठे ही अपने कंप्यूटर या मोबाईल से प्राप्त कर सकते हैं | तकनीक के साथ हाथ मिलाते हुए न्यायालय प्रशासन ने इसके लिए बहुत सारे उपाय किए हैं | बहुत सारे नए एप्स व मोबाईल सेवा का उपयोग करके न सिर्फ म...