ब्लॉगसेतु

लोकेश नशीने
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तुम सोचते हो किघर से निकाले गएमाँ-बाप बेघर हो जाते हैं,नहीं, नासमझी है ये तुम्हारी,बल्किमाँ-बाप के चले जाने सेतुम्हारा घर हीबेघर हो जाता हैचित्र साभार- गूगल
 पोस्ट लेवल : Nadeesh नज़्म नासमझी nazm poetry नदीश
लोकेश नशीने
551
ये कैसी तन्हाई है कि सुनाई पड़ता हैख़्यालों का कोलाहलऔर सांसों का शोरभाग जाना चाहता हूँऐसे बियावां मेंजहाँ तन्हाई होऔर सिर्फ तन्हाईलेकिननाकाम हो जाती हैंतमाम कोशिशेंक्योंकिमैं जब भी निचोड़ता हूँअपनी तन्हाई कोतो टपक पड़ती हैकुछ बूंदेंतेरी यादों कीचित्र साभार- गूगल
नई कलम
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नज़्म १ (ख़ुदा)एक ही पैगाम थातो क्यू इजाद की गईये अलग-अलग राहें?क्यू बांटना पड़ाएक ही पैगाम कोअलग-अलगकिताबों में?क्यू तामीर नहीं की गईएक ही मुकद्दस किताब?के जिसमें सिर्फ मुहब्बत मुहब्बतऔर मुहब्बत होती.....इसके अलावा कुछ नहींजिसे एक होना थागर वो एक होतातो फिर क...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में आजकल एहसासात का  बे-क़ाबू तूफ़ान आ पसरा है, शायद उसे ख़बर है कि आजकल वहाँ आपका बसेरा है।ज़िन्दगी में यदाकदा ऐसे भी मक़ाम आते हैं, कोई अपने ही घर में अंजान  बनकर सितम का नाम पाते हैं।कोई किसी को&nbs...
अनीता सैनी
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 तुम्हें मालूम है उस दरमियाँ, ख़ामोश-सी रहती कुछ पूछ रही होती है, मुस्कुराहट की आड़ में बिखेर रही शब्द, तुम्हारी याद में वह टूट रही होती है |बिखरे एहसासात बीन रही, उन लम्हात में वह जीवन में मधु घोल रही होती है,  नमक का दरिया बने नयन...
Sandhya Sharma
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 ख़यालों के पंख लगाकरख़्वाबों की उड़ान भरकरकितनी भी दूर क्यों न चली जाएलेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म"उतर आती है ज़मी परमेरे साथ नंगे पाँव घूमती हैपत्ता-पत्ता, डाल-डाल, बूटा -बूटाइसलिए तो तरोताज़ा रहती हैजब कभी यादों के सात समंदर पार करकेथककर निढाल हो जाती हैतो बैठ जा...
अनीता सैनी
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अनवरत तलाश करती है वह,वक़्त के झरोखे से मन की अथाह गहराई में,मोती-सी अनमोल,मन-सी मासूम, बेबाकपन में डूबी एक ख़ूबसूरत-सी नज़्म |जिस्म से सिमटी वक़्त की तह,हर तह  को पलट फिर सहेजती है वह, किसी में छिप जाती है किसी को छिपा देती है ,तलाशती है मोती-सी अन...
 पोस्ट लेवल : नज़्म
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सुनो मेघदूत!अब तुम्हें संदेश कैसे सौंप दूँ, अल्ट्रा मॉडर्न तकनीकी से, गूँथा गगन ग़ैरत का गुनाहगार है अब, राज़-ए-मोहब्बत हैक हो रहे हैं!हिज्र की दिलदारियाँ, ख़ामोशी के शोख़ नग़्मे, अश्क़ में भीगा गुल-ए-तमन्ना, फ़स्ल-ए-बहार में, दिल की धड़क...
अनीता सैनी
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मन में  उड़ती विचारों  की  धूल,करती है ख़्वाहिशों  को स्थूल ,  तत्परता के  साथ समझौता करती है ज़िंदगी |  बटेर-सी पुकारती  आत्मा की आवाज़,खेजड़ी की छाँव में बिठाकर ढाढ़स बँधाने का, ढकोसला ख़ूबसूरती से सजाती है ज़िंदगी |वक़्त...
 पोस्ट लेवल : नज़्म
sanjiv verma salil
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नज़्म: संजीव* ग़ज़ल मुकम्मल होती है तबजब मिसरे दर मिसरेदूरियों परपुल बनाती है बह्रऔर एक दूसरे कोअर्थ देते हैंगले मिलकरमक्ते और मतलेकाश हम इंसान भीसाँसों औरआसों के मिसरों सेपूरी कर सकेंज़िंदगी की ग़ज़लजिसे गुनगुनाकर कहें:आदाब अर्ज़आ भी जा ऐ अज़ल!**२-५-२०१५htt...
 पोस्ट लेवल : नज़्म nazm