ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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मार्क्सवाद का अर्धसत्य के बहाने एकालाप— पंकज शर्माअनंत ने पूरी दुनियाभर के जनसंघर्षों को एक नया आयाम प्रदान करने वाले महानायक के निजी जीवन संदर्भों के हवाले से उन्हें खलनायक घोषित कर दिया और भारतीय सामाजिक परंपरा के परिप्रेक्ष्य में उनका मूल्यांकन करने के फिराक में...
Yashoda Agrawal
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तेरे खामोश होने की क्या थी वज़ह,कि फिर लौट न आने की क्या थी वज़ह।तेरे होने न होने का अब फर्क नहीं पड़ता,साथ होकर भी साथ न होने की क्या थी वज़ह।बीती बातों का क्यों अफसोस है तुझे,ग़ज़ल लिखने की क्या थी वज़ह।मगरूर हुए वो कुछ इस तरह,दिल टूट बिखर जाने की क्या थी वज़ह।बातें तुम...
 पोस्ट लेवल : पंकज शर्मा वज़ह
Yashoda Agrawal
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ज़र्रा ज़र्रा दहक उठता है,जब बेबात अदावत होती है।हर कोना कोना रिसता है..जब कोई शहादत होती है।कुछ बड़ी मीनारें झुक जावेकुछ ठंडे छींटे दे जावे..कुछ देर सलामी होती है।दम घुट घुट के रह जाता है,जब शहीदों पे सियासत होती है।-पंकज शर्मा