ब्लॉगसेतु

दीपक कुमार  भानरे
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                                इमेज गूगल साभारउठा लो मुझे इन आवारा राहों से ,न उछाला जाऊं इधर उधर बेकार ,न खाऊ ठोकरें पग पग की बार बार ,न लगे मुझसे राहगीरों को चोटों की मार ,न बनू में...
 पोस्ट लेवल : पुकार पत्थर
अनीता सैनी
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 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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पथरीले हठीले हरियाली से सजे पहाड़ ग़ाएब हो रहे हैं बसुंधरा के शृंगार खंडित हो रहे हैं एक अवसरवादी सर्वे के परिणाम पढ़कर जानकारों से मशवरा ले स्टोन क्रशर ख़रीदकर एक दल में शामिल हो गया चँदा भरपूर दिया संयोगवश /...
मुकेश कुमार
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सफ़र के आगाज में मैं था तुम साजैसे तुम उद्गम से निकलती तेज बहाव वाली नदी की कल कल जलधाराबड़े-बड़े पत्थरों को तोड़तीकंकड़ों में बदलती, रेत में परिवर्तित करतीबनाती खुद के के लिए रास्ता.थे जवानी के दिनतभी तो कुछ कर दिखाने का दंभ भरतेजोश में रहते, साहस से लबरेज&nb...
Yashoda Agrawal
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तेज हवाओं मेंजब झांकता हूँ खिड़की से उस ओरतो इन पेड़ों के नृत्य मेंतलाशता हूँ कुछ,उसी समय आसमान मेंबहते बादलों मेंमिलता है एक अक्सहू-ब-हू तुम जैसाआँखें, नाक, कान और बाल।और वो अक्सबादलों पर सवार होकरजा रहा है दूरबहुत दूरउसके पीछे भागना मेरे बस में कहांबस देखता रहूंगा...
Nitu  Thakur
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 सूखे पत्ते बंजर धरती क्या नजर नहीं आती तुमको ये बेजुबान भूखे प्यासे क्या खुश कर पायेंगे तुमको हे इंद्रदेव, हे वरुणदेव किस भोग विलास में खोये हो या किसी अप्सरा की गोदी में सर रखकर तुम सोये हो  करते है स्तुति गान तेर...
sanjiv verma salil
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नवगीत:जिजीविषा अंकुर कीपत्थर का भी दिलदहला देती है*धरती धरती धीरजबनी अहल्या गुमसुमबंजर-पड़ती लोग कहेंताने दे-देकरसिसकी सुनता समयमौन देता है अवसरहरियाती है कोखधरा हो जाती सक्षमतब तक जलती धूपझेलकर घाव आपसहला लेती है*जग करता उपहासमारती ताने दुनियापल्लव ध्यान न देतेकोशि...
sanjiv verma salil
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नवगीतपत्थरों के भी कलेजेहो रहे पानी. आदमी ने जब सेमन पर रख लिए पत्थरदेवता को दे दिया हैपत्थरों का घररिक्त मन मंदिर हुआयाद आ रही नानी.नाक हो जब बहुत ऊँचीबैठती मक्खीकब गयी कट?, क्या पता?उड़ गया कब पक्षीनम्रता का?, शेष दुर्गतिअहं ने ठानी.चुराते हैं, झुकाते हैं आँख...
शरद  कोकास
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सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जायेगा (बशीर बद्र) मुसीबतें पहले भी कम नहीं थीं इंसान की ज़िन्दगी में । यह मानव जीवन का प्रारंभिक दौर था जब वह आदिम मनुष्य जन्म ,मृत्यु और प्रकृति के रहस्यों से नावाकिफ था , कार्य और कार...
PRABHAT KUMAR
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कश्मीर में आतंकवाद और पत्थरबाज: कैसे हो स्थायी समाधान?" पर मेरा लेख।आये दिन हम स्वर्ग की नगरी कश्मीर के बारे में हम समाचार पढ़ते ही है. समाचार पत्र कश्मीर में हिंसा को लेकर कई कई खबरे छापते है और हम पढ़ते भी है. परन्तु कभी हमें कश्मीर की अच्छी बातों को जानने और पढ़ने...