ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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सुदूर दिश में दौड़ता अबोध छौनाबादल-सी भरता भोली कुलाँच। तपती धूप ने किया है कोई फ़रेब या उमसाए सन्नाटे ने लगाई है आँच। मरुस्थल पर  हवा ने बिखेरे हैं धोरे  काल की रेत पर मूर्छित हैं पदचाप।गर्दन घुमा देखता बकरियों का समूहगूँजता गड़रिये का व...
kuldeep thakur
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सादर अभिवादन..भूमिका लिखना नहीं आता हमेंतात्कालिक घटनाओं का वर्णन हम भले ही कर दें पर किसी विषय विशेष पर लिखनाअसहज से हो जाते हैं हम...सखी श्वेता लापता हैपर सम्पर्क में है..एक किस्सा याद आ रहा हैकंजूस और उसकी श्रीमति के बीच हुई बात-चीतसूम कहे सूमिन सेकाहे...
 पोस्ट लेवल : 1669 पदचाप
Yashoda Agrawal
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सरल अनुभूति के जटिल अर्थ,भाव खदबदाहट, झुलसाते भाप।जग के मायावी वीथियों में गूँजितचीन्हे-अनचीन्हे असंख्य पदचापतम की गहनता पर खिलखिलाते,तप तारों का,भोर के लिए मंत्रजाप।मूक परिवर्तन अविराम क्षण प्रतिक्षण, गतिमान काल का निस्पृह पदचापज्ञान-अज्ञान,जड़-चेतन के गूढ़ प्र...
 पोस्ट लेवल : पदचाप
अनीता सैनी
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सोलह बसंत बीते, बाँधे चंचलता का साथ,   आज सुनी ख़ुशियों की, प्रफुल्लित पदचाप,  घर-आँगन में बिखरी यादें,  महकाती बसंत बयार,  छौना मेरा यौवन की, दहलीज़ छूने को तैयार ।गगन में फैली चाँदनी-सा, शुभ्रतामय यश...
Yashoda Agrawal
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फिर कहीं मधुमास की पदचाप सुन,डाल मेंहदी की लजीली हो गई।दूर तक अमराइयों, वनबीथियों मेंलगी संदल हवा चुपके पांव रखने,रात-दिन फिर कान आहट पर लगाएलगा महुआ गंध की बोली परखनेदिवस मादक होश खोए लग रहे,सांझ फागुन की नशीली हो गई।हंसी शाखों पर कुंआरी मंजरीफिर कहीं टेसू के सुलग...
 पोस्ट लेवल : पदचाप
ANITA LAGURI (ANU)
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रात्रि का दूसरा पहरकुछ पेड़ ऊँघ रहे थेकुछ मेरी तरह शहर का शोर सुन रहे थेकि पदचापों की आती लय ताल नेकानों में मेरेपंछियों का क्रंदन उड़ेल दियातभी देखा अँधेरों मेंचमकते दाँतों के बीचराक्षसी हँसी से लबरेज़ दानवों कोजो कर रहे थे प्रहार हम परकाट रहे थे हमारे हाथों कोप...
Bhavna  Pathak
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आ गया अवसानलो अब दिवस काआओ साथी चलोअब घर को चलेंदृश्य करलो बंदसुंदर नयन मेंउल्लसित मन लिएअब घर को चलेंसांझ की बेलासुनाती रागनीगुनगुनाते उसेअब घर को चलेंलो सुनो पदचापआती निशा केकर सभी को नमनअब घर को चलें---------  शिवशंकर