जुड़ते -टूटते धागों ने ,जलते बुझते आगों ने ,बनते बिगड़ते रागों ने ,समाज के विषधर नागों नेपद-निशान को किसने मोड़ दियापथ " निशान " का किसने मोड़ दिया ||१पकड़ते छूटते हाथों नेमिलते बिछड़ते साथों नेबनती बिगडती बातों नेमुंह मांगी सौगातों नेपद-निशान को किसने मोड़ दियापथ " निशान...