ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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समय बदलता रहता है, समय के साथ बहुत कुछ भी बदलता रहता है. यह बदलाव व्यक्तियों में भी दिखाई देता है. यह अपने आपमें सार्वभौम सत्य है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है मगर किसी के प्रति स्वभाव में परिवर्तन हो जाना प्राकृतिक परिवर्तन नहीं कहा जा सकता. दिन होना, फिर रात का...
दिनेशराय द्विवेदी
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नगरों और स्थानों के बदलने की जो गधा-पचीसी चल रही है, उस की रौ में सब बहे चले जा रहे हैं। वे यह भी नहीं सोच रहे हैं कि वे क्या बदल रहे हैं, और क्यों बदल रहे हैं। बस एक भेड़ चाल है जो ऊपर से नीचे तक चली आई है। प्रधानजी सब से आगे वाली भेड़ हैं, उन के पीछे मुखियाजी चल...
 पोस्ट लेवल : नाम व्यंग्य परिवर्तन
Bhavna  Pathak
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हे सत्ता महरानी तेरी महिमा अपरम्पार है। मैं मूढ़ अज्ञानी इसे कभी समझ न पाया और पूरी जवानी व्यवस्था परिवर्तन की आस में गैरदलीय राजनीति के पीछे कोल्हू के बैल की तरह चलने में गुजार दी। हे सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान देवी तूने मुझ जैसों के ज्ञान चक्षु खोलने के लिए ही अपना...
Bhavna  Pathak
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धरती के दूसरे प्राणियों की तरह मनुष्य ने भी भोजन, आवास जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए लंबी जद्दोजेहद की। विचार और कल्पना शक्ति के सहारे विज्ञान टेक्नालॉजी की मदद से सुख सुविधाओं के अंबार खड़े कर लिए। इसी क्रम में मुसीबतों का मकड़जाल भी बुन लिया। जलवायु परिवर्तन, हथिय...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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प्रख्यात समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया कहा करते थे कि जिन्दा कौमें 5 साल तक इंतजार नहीं करती हैं। लेकिन, देश के सबसे बड़े सूबे में समाजवादी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव 5 साल के बाद भी उत्तर प्रदेश की जनता को “परिवर्तन की आहट” ही सुना पा रहे हैं। और इसी परिवर्तन की...
sanjeev khudshah
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काले धन पर लगाम के नाम पर मुद्रा परिवर्तन-कितना सही कितना गलत एक विश्‍लेषण संजीव खुदशाहआज सुबह घरों में काम करने वाली एक महिला ने बताया की 500 और 1000 रूपए के नोट बंद हो गये है। वो काफी परेशान लग रही थी, उसने आगे बताया की इस रविवार उसकी बी सी खुली थी जिसके 12000 रू...
विजय राजबली माथुर
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हम लेकर रहेंगे आजादी ।सीतामढी मे खेत मजदूर यूनीयन को समबोधीत करते जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष साथी कन्हैया और हम । आने वाले दिनों में हम हिन्दुस्तान की सरज़मी से संघ का खात्मा कर देंगे । सीतामढ़ी में उमड़ी भीड़ यह बता रही थी कि हिन्दुस्तान को किसी भी...
सुशील बाकलीवाल
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            वर्षों पूर्व मेरे ससुराल के 40-45 वर्ष के आसपास की उम्र के दो रिश्तेदार ।  दोनों ही सीने में दर्द के रोगी, और दोनों ही मुझे ससुराल पक्ष के होने के कारण कंवर साब कहकर सम्बोधित करते थे । एक जब भी...
ऋता शेखर 'मधु'
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अपनी ही तपनवह झेल न पातासाँझ ढले सागर की गोद में धीरे से समातानहा धो कर नई ताजगी के साथ वह चाँद बन निकल आताचाँदनी का दामन थामशुभ्र उज्जवल प्रभास सेजग को शीतल मुस्कान दे जाताहाँ, साँझ ढलते ही वह प्रेमी  प्रेमिका का उपमान बनबच्...
अजय  कुमार झा
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देश की प्रशासनिक संरचना को तय करते समय जिस बात का ध्यान सबसे अधिक रखा गया था वह बात थी शासन व्यवस्था के तीनों अंगों के बीच कार्य व शक्ति का पृथ्क्करण व सबसे ज्यादा इनके बीच समान संतुलन । चाहे अनचाहे, गाहे-बेगाहे ये तीनों ही राज्य के प्रशासनिक ढांगे को स्थाई व दुरूस...