ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई तो बहुत से लोगों को लगा कि उनको घर में कैद कर दिया गया है. प्रधानमंत्री के शब्द कुछ ऐसे थे भी कि लोगों ने इसे एक तरह का कर्फ्यू ही समझा. समझना भी चाहिए था. खैर, चर्चा इसकी नहीं. लॉकडाउन का कौन, कितना, किस तरह से पालन कर रहा, यह उसकी म...
kumarendra singh sengar
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ज़िन्दगी भर इस बात की टीस रहेगी कि कभी आपसे खुलकर बात भी न कर सके. पिता, पुत्र के बीच का जैसा सम्बन्ध आज देखने को मिलता है, उस समय सोचा भी नहीं जा सकता था. कई-कई महीने तो ऐसे निकल जाया करते थे जबकि हमारे और आपके बीच किसी तरह की कोई बातचीत नहीं होती थी. जबसे होश संभा...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )बढ़ते तलाक के पीछे रिश्तों के बदले समीकरणयूएन की रिपोर्ट में यह बात रेखांकित की गई है कि बीते दो दशकों में महिलाओं के अधिकार काफी बढ़े हैं, लेकिन परिवार...
kumarendra singh sengar
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समूचे परिवार के लिए वह ख़ुशी का दिन था. परिवार की सबसे बड़ी बेटी के विवाह सम्बन्धी आयोजनों का शुभारम्भ हुआ था. बड़े-छोटे सभी प्रसन्न होने के साथ-साथ अत्यंत ऊर्जावान लग रहे थे. संयुक्त परिवार की यही विशेषता होती है कि आयोजन छोटा हो या बड़ा, सभी उसमें अपने अधिकाधिक अंश क...
kumarendra singh sengar
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समय रफ़्तार से निकलता है ये बात बहुत लम्बे समय से जानते आये हैं. ऐसा बताया भी जाता रहा है कि समय किसी के लिए नहीं रुकता है, बस भागता ही रहता है. ऐसा विगत काफी समय से देख भी रहे हैं जबकि समय कुछ ज्यादा ही रफ़्तार पकड़ता जा रहा है. अब देखिये, ऐसा लग रहा है जैसे अभी बहुत...
सुशील बाकलीवाल
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             इस दुनिया में हमारा आना अपने माता-पिता के कारण होता है और उनसे जुडे अन्य दूसरे रिश्ते स्वतः हमारे साथ भी जुड जाते हैं, वे हमें अच्छे लगें या नहीं ये अलग बात है किंतु हमें उन्हें अनिवार्य रुप से जीवन भर...
kumarendra singh sengar
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आज की पोस्ट रिश्तों पर लिखने की सोच रहे थे मगर लगा कि रिश्तों की परिभाषा है क्या? जो हम आपसी संबंधों के द्वारा निश्चित कर देते हैं, क्या वही रिश्ते कहलाते हैं? क्या रिश्तों के लिए आपस में किसी तरह का सम्बन्ध होना आवश्यक है? दो व्यक्तियों के बीच की दोस्ती को क्या कह...
kumarendra singh sengar
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वो आज की ही तारीख थी, 31 दिसम्बर. तैयारियाँ ख़ुशी की स्थिति में चल रही थीं और उसी समय दुखद खबर का आना हुआ. जहाँ जाना था, जाना उसी दिशा में हुआ; उसी मंजिल को हुआ मगर अब जाते समय मन की स्थिति अलग थी. सबकुछ समझने के बाद भी न समझने जैसी स्थिति बनी हुई थी. हाथ से निकल चु...
kumarendra singh sengar
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कुछ पुराने मित्रों को याद किया और कुछ नए मित्रों की सुध ली. इस बार का दशहरा, दीपावली कुछ खाली-खाली सी नजर आई. इसके पार्श्व में कतिपय घटनाक्रमों का भी होना रहा मगर उससे ज्यादा लोगों का अब सोशल मीडिया के द्वारा त्योहारों को मना लेना भी रहा. हमारे परिवार सहित कुछ मित्...
kumarendra singh sengar
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परिवार में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने आपमें एक आधार स्तम्भ होते हैं. उनके न कहने के बाद भी वे किसी न किसी रूप में परिवार को एकसूत्र में जोड़े रखने का काम करते हैं. परिवार की मान-मर्यादा को, उसकी प्रतिष्ठा को, उसके वर्चस्व को ऐसे ही लोगों के द्वारा स्वतः ही स्थापना...