ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:संजीव 'सलिल'*कथ्य, भाव, रस, शिल्प, लय, साधें कवि गुणवान.कम न अधिक कोई तनिक, मिल कविता की जान..*मेघदूत के पत्र को, सके न अब तक बाँच.पानी रहा न आँख में, किससे बोलें साँच..ऋतुओं का आनंद लें, बाकी नहीं शऊर.भवनों में घुस कोसते. मौसम को भरपूर..पावस ठंडी ग्रीष्...
 पोस्ट लेवल : दोहा पर्यावरण
Asha News
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण झाबुआ राजेश कुमार गुप्ता के निर्देशन में यहाॅं वन विद्यालय (ईको सेन्टर) में विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को विधिक साक्षरता एवं कोरोना वायरस संक्रमण रोकथाम उपाय, बचाव तथा पर्यावरण एवं वन अधिनियम से सं...
kuldeep thakur
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शुक्रवारीय अंक मेंआप सभी का स्नेहिल अभिवादन------आज विश्व पर्यावरण दिवस पर फिर से एक बार प्रभावशाली स्लोगन जोर-जोर से चिल्लायेगे,पेड़ों के संरक्षण के भाषण,बूँद-बूँद पानी की कीमत पहचानिये..और भी न जाने क्या-क्या लिखेगे और बोलेगे। पर सच तो यही है अपनी सुविधा...
 पोस्ट लेवल : 1785 पर्यावरण दिवस
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--पेड़ लगाना धरा पर, मानव का है कर्म।पर्यावरण सुधारना, हम सबका है धर्म।।--हरितक्रान्ति से मिटेगा, धरती का सन्ताप।पर्यावरण बचाइए, बचे रहेंगे आप।।--प्राणवायु का पेड़ ही, होते हैं आधार।पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का सिंगार।।--पेड़ भगाते रोग को, बनकर वैद...
 पोस्ट लेवल : दोहे पर्यावरण दिवस
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--मधुर पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है,हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है।बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।--बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभ...
sanjay krishna
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डॉ  नितीश प्रियदर्शीपर्यावरणविद24 मार्च से भारत में लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण देश के कई हिस्सों में भी इंसानी गतिविधियों की रफ्तार थमी है और इस दौरान प्रकृति अपनी मरम्मत खुद करती नजर आ रही है।  गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगने और ज्यादातर कारखानें बंद...
शिवम् मिश्रा
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सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। राजेन्द्र सिंह (अंग्रेज़ी: Rajendra Singh, जन्म- 6 अगस्त, 1959, बागपत ज़िला, उत्तर प्रदेश) भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं। राजस्थान का अलवर ज़िला शुरू से एक स...
Kavita Rawat
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sanjiv verma salil
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पर्यावरण गीत:किस तरह आये बसंतसंजीव*मानव लूट रहा प्रकृति कोकिस तरह आये बसंत?...*होरी कैसे छाये टपरिया?धनिया कैसे भरे गगरिया?गाँव लील कर हँसे नगरिया,राजमार्ग बन गयी डगरियाराधा को छल रहा सँवरियासुत भूला माँ हुई बँवरियाअंतर्मन रो रहा निरंतरकिस तरह गाये बसंत?...*सूखी नद...
 पोस्ट लेवल : paryavaran geet पर्यावरण गीत
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:संजीव 'सलिल'*कथ्य, भाव, रस, शिल्प, लय, साधें कवि गुणवान.कम न अधिक कोई तनिक, मिल कविता की जान..*मेघदूत के पत्र को, सके न अब तक बाँच.पानी रहा न आँख में, किससे बोलें साँच..ऋतुओं का आनंद लें, बाकी नहीं शऊर.भवनों में घुस कोसते. मौसम को भरपूर..पावस ठंडी ग्रीष्...
 पोस्ट लेवल : दोहे पर्यावरण के dohe