ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
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सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। राजेन्द्र सिंह (अंग्रेज़ी: Rajendra Singh, जन्म- 6 अगस्त, 1959, बागपत ज़िला, उत्तर प्रदेश) भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं। राजस्थान का अलवर ज़िला शुरू से एक स...
Kavita Rawat
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sanjiv verma salil
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पर्यावरण गीत:किस तरह आये बसंतसंजीव*मानव लूट रहा प्रकृति कोकिस तरह आये बसंत?...*होरी कैसे छाये टपरिया?धनिया कैसे भरे गगरिया?गाँव लील कर हँसे नगरिया,राजमार्ग बन गयी डगरियाराधा को छल रहा सँवरियासुत भूला माँ हुई बँवरियाअंतर्मन रो रहा निरंतरकिस तरह गाये बसंत?...*सूखी नद...
 पोस्ट लेवल : paryavaran geet पर्यावरण गीत
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:संजीव 'सलिल'*कथ्य, भाव, रस, शिल्प, लय, साधें कवि गुणवान.कम न अधिक कोई तनिक, मिल कविता की जान..*मेघदूत के पत्र को, सके न अब तक बाँच.पानी रहा न आँख में, किससे बोलें साँच..ऋतुओं का आनंद लें, बाकी नहीं शऊर.भवनों में घुस कोसते. मौसम को भरपूर..पावस ठंडी ग्रीष्...
 पोस्ट लेवल : दोहे पर्यावरण के dohe
kumarendra singh sengar
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वर्तमान दौर में पर्यावरण असंतुलन की सबसे बड़ी समस्या ग्लोबल वॉर्मिंग है. इस कारण से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे मानव जीवन के कदम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में अगर हमने पर्यावरण को बचाने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया तो वह दिन दूर नहीं, जब हमारा अस्तित्व ही...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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 प्रकृति की, स्तब्धकारी ख़ामोशी की, गहन व्याख्या करते-करते, पुरखा-पुरखिन भी निढाल हो गये, सागर,नदियाँ,झरने,पर्वत-पहाड़, पोखर-ताल,जीवधारी,हरियाली,झाड़-झँखाड़,क्या मानव के मातहत निहाल हो गये?नहीं !...... कदापि नहीं !औद्योगिक क्राँति,पूँजी का...
देवेन्द्र पाण्डेय
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कुछ शब्द दोउछालूँ दर्द भर कर हवा मेंनभ चीर कर बरसें बादल उमड़-घुमड़भर जाएताल-तलैयों सेधरती का ओना-कोनाहरी-भरी होधरती।कुछ शब्द दोतट पर जाअंजुलि-अंजुलि चढ़ाऊँस्वच्छ/निर्मलकल-कल बहने लगेगंगा।कुछ शब्द दोगूँथ कर पाप, सारे जहाँ केहवन कर दूँबोल दूँ..स्वाहा!शब्दों से हो सकता...
 पोस्ट लेवल : कविता पर्यावरण
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार साथियो, पर्यावरण दिवस वैसे तो कल, 5 जून को मनाया जाता है किन्तु इस सम्बन्ध में जागरूकता लगातार फैलाई जा रही है. इसी संबंध में एक चित्र प्राप्त हुआ. इसे देखने के बाद एहसास हुआ कि इसके बारे में बताने, इसका विश्लेषण करने के लिए किसी भी तरह के शब्दों की आवश्यकत...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )     संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
Lokendra Singh
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फोटो विश्व प्रसिद्द बौद्ध स्थल 'साँची' परिसर का हैबारिश की बेरुखीऔर चिलचिलाती धूप में वो बूढ़ा दरख्त सूख गया हैसाखों पर बने घोंसले उजड़ गएउजड़े घोंसलों के बाशिन्दे/ परिन्देनए ठिकाने/ आबाद दरख्त की तलाश में उड़ चलेबूढ़ा दरख्त तन्हा रह गयाआंसू बहाता, चिलचिलाती धूप मे...