ब्लॉगसेतु

Sandhya Sharma
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पलाश की डालियों पर                         सज गए हो तुमदहक रहे होपूरे जंगल मेंमुझे पता हैकोई आये न आयेतुम ज़रूर आओगेसब कुछ बदल जायेगापर तुम न बदलोगेबने रहोगे तुमजस के तसआओ तुम्हारास्वागत है वसंत ...आप...
 पोस्ट लेवल : पलाश वसंत जंगल
sanjiv verma salil
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मतदाता विवेकाधिकार मंच*त्रिपदिक छंद हाइकुविषय: पलाशविधा: गीत*लोकतंत्र का / निकट महापर्व / हावी है तंत्र*मूक है लोक / मुखर राजनीति / यही है शोकपूछे पलाश / जनता क्यों हताश / कहाँ आलोक?सत्ता की चाह / पाले हरेक नेता / दलों का यंत्र*योगी बेहाल / साइकिल है पंचर / हाथी बे...
 पोस्ट लेवल : पलाश हाइकु गीत नोटा
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--कितने हसीन फूल, खिले हैं पलाश मेंफिर भी भटक रहे हैं, चमन की तलाश में--पश्चिम की गर्म आँधियाँ, पूरब में आ गयीग़ाफ़िल हुए हैं लोग, क्षणिक सुख-विलास में--जब मिल गया सुराज तो, किरदार मर गयाशैतान सन्त सा सजा, उजले लिबास में--क़श्ती को डूबने से, बचायेगा कौन अबशामिल हैं...
विजय राजबली माथुर
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roushan mishra
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दहक उठी हैपेड़ों पर आगखिल गए फिर से पलाश फिर से &#...
 पोस्ट लेवल : पलाश टेसू ढाक Flame of forest
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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छाया बसंत है बसंत-बहार मुदित जिया महका बाग़ चहकी कली-कली कूकी कोयल बौराये आम झूमी पीली सरसों मिले साजन मस्त फ़ज़ाऐं गुनगुनी धूप है हरे शजर ढाक-पलाश सुर्ख़ हुआ जंगल महके फूल खिला बाग़ीचा फूलो...
Aparna  Bajpai
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पलाश के लाल-लाल फूल खिलते हैं जंगल में,मेरा सूरज उगता है तुम्हारी आँखों में,मांग लेती हूँ धूप  थोड़ी सी तुमसे;न जाने कब,हमारे प्रेम का सूरज डूब जाए मुरझा जाएँ पलाश मरणासन्न हो जाये जंगल,कोशिश हैखिले रहें पलाश ,हरा रहे जंगल बची रहे तुम्ह...
अरुण कुमार निगम
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कुण्डलिया छन्द:पहचाना जाता नहीं,  अब पलाश का फूलइस कलयुग के दौर में, मनुज रहा है भूलमनुज रहा है भूल,   काट कर सारे जंगलकंकरीट में  बैठ,  ढूँढता  अरे  सुमङ्गलतोड़ रहा है नित्य,  अरुण कुदरत से नाताअब पलाश का फूल,  नहीं पहचा...
sanjiv verma salil
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हाइकु सलिला: हाइकु का रंग पलाश के संग संजीव *करे तलाश अरमानों की लाशलाल पलाश *है लाल-पीला देखकर अन्याय टेसू निरुपाय *दीन न हीन हमेशा रहे तीन ढाक के पात *आप ही आपसहे दुःख-संताप टेसू निष्पाप * देख दुर्दशा पलाश हुआ लाल प्रि...
 पोस्ट लेवल : पलाश sanjiv संजीव palash haiku हाइकु
sanjiv verma salil
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नवगीत :संजीव .खिल-खिलकर गुल झरे पलाशों के .ऊषा के रंग मेंनहाये से.संध्या कोअंग सेलगाये से.खिलखिलकरहँस पड़ेअलावों से.लजा रहेगाल हुएरतनारे.बुला रहेनैन लियेकजरारे.मिट-मिटकरबन रहेनवाबों से*http://divyanarmada.blogspot.in/