ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
17
पावन प्रीत के सुन्दर सुकोमल सुमन, सुशोभित स्नेह से करती साल-दर-साल,  अलंकृत करती है हृदय में प्रति पल वह,  फिर यादों का कलित मंगलमय थाल |  बाती बना जलाती साँसें कोअखंड ज्योति-सी, जीवन में प्...
विजय राजबली माथुर
75
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
आनन्द वर्धन त्रिपाठी
761
 कोरबा की सतरंगा झील जैसी खूबसूरत जगह देखने के बाद मैं और विनय वहाँ से अगली खूबसूरत जगह देखने निकल गये। सतरंगा झील से करीब पंद्रह किलोमीटर के बाद पहाड़ी शुरू हो गयी। पहाड़ी की घुमावदार सड़क और दोनों तरफ दूर तक फैली हरियाली। धूप होने के बावजूद पहाड़ी और हरियाली...
संजीव तिवारी
396
वादी को स्वयं अपने पैरों पर खड़ा होना होता है। वह दूसरे की कमजोरी का लाभ नहीं उठा सकता। विधि का यह सुस्थापित सिद्धांत है कि-‘‘जो दस्तावेज जिसके आधिपत्य में है, उसी से उसको प्रस्तुत किये जाने या उसे प्रस्तुत करवाने की अपेक्षा की जाती है।’’ मूल दस्तावेज के प्रगटीकरण...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
121
दोपहर   बनकर   अक्सर  न   आया   करो।सुबह-शाम   भी   कभी   बन   जाया   करो।।चिलचिलाती   धूप    में   तपना   है  ज़रूरी।कभी  शीतल  चाँदनी  में  भी  नहाया  करो...
संजीव तिवारी
396
संविदा पूर्ण करने में यदि वादी अपने दायित्व के निर्वहन में स्वयं ही चूूक करता है व प्रतिवादी की सूचना पर भी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करता। साम्या उसके पक्ष में निर्धारित नहीं हो सकती जो स्वयं चुूूक व विलम्ब के लिये उत्तरदायी हों।(adsbygoogle = window.adsbygoogl...
जन्मेजय तिवारी
444
                      नींद नहीं आ रही थी । करवट बदल-बदल कर उसे बुलाने की सारी कोशिशें बेकार गई थीं । अंततः बिस्तर को छोड़ देना ही मुझे उचित जान पड़ा । मैं घर से बाहर निकल आया और धीरे-धीरे सड़क पर बढ़ने लगा...
Bhavana Lalwani
360
दिन गुज़रते हैं फिर भी वक़्त थमा  हुआ सा है.ये एक अजीब मौसम है, इसमें दिन और रात का हिसाब आपस में गड्डमड्ड सा हो गया है. यहां उत्तरी ध्रुव की लम्बी रौशनियों वाली रातें भी हैं और  महासागर  के अथाह विस्तार जैसे  अनंत तक पसरे हुए दिन भ...
सुनील  सजल
242
व्यंग्य- आधुनिक गुरु के तर्क पिछले दिनों सरकार ने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त आदेश जारी किए | कारण , गिरते परीक्षा परिणाम , बदहाल शाली व्यवस्थाएं ,,लापरवाह शिक्षकों को सुधारना था | अत: दखल देने का अधिकार जनता , सरकारी अधिकारी व जनप्रतिनिधि  के हाथ में...
मधुलिका पटेल
546
सोच रहा हूँ आज अपने गाँव लौट लेगांवों में अब भी कागा मुंडेर पर नज़र आते हैंउनके कांव - कांव से पहुने घर आते हैं पाँए लागू के शब्दों से होता है अभिनंदनआते ही मिल जाता है कुएँ का ठंडा पानी और गुड़ धानीनहीं कोइ सवाल क्यों आए कब जाना है नदी किनारे गले मे...