ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
सुशील बाकलीवाल
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                           एक पण्डितजी एक दिन शास्त्राथ की जिद में  अपने बच्चे से उलझ गये । बच्चे ने भी एक प्रश्न दाग दिया कि अच्छा बताओ- "वो कौन सी वस्तु है, जो कभी अपवित्र नहीं होती......?...
सतीश सक्सेना
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घर घर से आवाज कन्हैया जीतेगा !कौओं में परवाज़ ,कन्हैया जीतेगा !बुलेट ट्रेन,स्मार्ट सिटी के झांसों में फंदे काट तमाम,कन्हैया जीतेगा !नहले दहले, अंतिम  ठठ्ठा मार रहेमक्कारों पर गाज़,कन्हैया जीतेगा !भारत मां घायल है ,इन गद्दारों  से , जनमन लेके साथ,क...
सतीश सक्सेना
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वह दिन भूलीं कृशकाय बदन,अतृप्त भूख से , व्याकुल हो,  आयीं थीं , भूखी, प्यासी सी इक दिन इस द्वारे आकुल हो जिस दिन से तेरे पाँव पड़े  दुर्भाग्य युक्त इस आँगन में !अभिशप्त ह्रदय जाने कैसे ,भावना क्रूर इतनी मन में ,पीताम्बर प...
सतीश सक्सेना
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हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर, ढोर क्यों ?जाहिलों को मुग्ध करने को निरंतर शोर क्यों !अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए ये धूर्त मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में   रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मु...
सतीश सक्सेना
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खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घोटू पटाखे ,राम के आने पे कितने दीप आँखों में जले,अब लिखते आँखें जल रही हैं ,जा...
सतीश सक्सेना
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खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घोटू पटाखे ,राम के आने पे कितने दीप आँखों में जले,अब लिखते आँखें जल रही हैं ,जा...
विजय राजबली माथुर
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*  एक समय ऐसा था कि ढोंग और पाखंड को बढ़ावा देने के लिए बहुत से लोग युवा अवस्था में ही सन्यासी बनकर मंदिरों में चले जाते थे लेकिन युवावस्था में होने के कारण अपनी हवस पर काबू नहीं कर पाते थे तब अपनी हवस को मिटाने के लिए कन्यादान का षड्यंत्र रचा गया था।&nbsp...
सतीश सक्सेना
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इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना ! दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना घरों में बंद,मां बहनों पे,कुछ आसान सा लिखना !विदूषक हैं , यहाँ धर्माधिकारी ,उनके शिष्यों के , इन हिंदी पुरस्कारों के लिए,अपमान सा...
विजय राजबली माथुर
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Hemant Kumar Jha29-09-2018 बकरा कसाई की जयजयकार कैसे करता है, यह देखना हो तो भारतीय मध्यवर्ग के राजनीतिक मनोविज्ञान को समझना होगा।यही वह वर्ग है जिसने भाजपा की राजनीतिक सफलताओं को आधारभूमि उपलब्ध कराई। इस संदर्भ में इन लोगों ने जातीय ध्रुवीकरण को भी नकारा। सवर...