ब्लॉगसेतु

Akshitaa (Pakhi)
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अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल (Ahmedabad International Literature Festival) में हम भी सपरिवार शामिल हुए। 16 और 17 नवंबर को आयोजित हुए इस लिटरेचर फेस्टिवल में देश-दुनिया की विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को आमंत्रित किया गया। फेस्टिवल के संस्थापक निदेशक श्री उम...
मुकेश कुमार
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जब सैंतालीस,धप्पा करते हुए बोले अड़तालीस कोजी ले तू भी उम्मीदों भरा सालहै भविष्य के गर्त में कुछ फूलजो बींधेंगे उंगलियों कोक्योंकि है ढेरों काटें भरे तनेतब तुम सब हैप्पी बड्डे कहना।जब सैंतालीसकरे याद छियालीस की झप्पी कोजो सर्द निगाहों से ताक करनम हो चुकी आवाज मेंपिछ...
जेन्नी  शबनम
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जीवन-युद्ध   *******   यादों के गलियारे से गुज़रते हुए   मुमकिन है यादों को धकेलते हुए   पार तो आ गई जीवन के   पर राहों में पड़ी छोटी-छोटी यादें   मायूसी-से मेरी राह तकती दिखीं   कि ज़रा थम कर याद क...
शेखर सुमन
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ज़िन्दगी में कई सारे फेज होते हैं, बचपन में जब आप अपने पिता का सम्मान करते हैं, फिर एक वक़्त आता है जब दूरियां बढ़ जाती हैं, आपको आजादी चाहिए होती है और उनको अनुशासन, मन कड़वा होता है उन दिनों, नज़र बचाते फिरते हैं...  फिर एक वक़्त के बाद गर्व भाव आता है कि उन्होंने...
 पोस्ट लेवल : आत्मकथा पापा
Akshitaa (Pakhi)
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मैं मांस, मज्जा का पिंड नहींदुर्गा, लक्ष्मी और भवानी हूँ भावों से पुंज से रचीनित्य रचती सृजन कहानी हूँ ...कॉलेज में प्रवक्ता और फिर साहित्य, लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में प्रवृत्त आकांक्षा यादव बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। नारी, बाल विमर्श और सामाजिक मुद्दों...
Akshitaa (Pakhi)
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Today is Happy Birthday of my sweet Papa. Many happy returns of the day dear Papa. You are our life. We love you too much.
MyLetter .In
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-सत्येंद्र सिद्धार्थमेरी प्यारी बिटिया,आज मेरे मन में उठने वाले हर भाव को, एहसास को एवं अपार ख़ुशी को अपने सार्थक शब्दों में पिरोकर उन्हें नया आयाम देना चाहता हूँ. बिटिया, भावनाओं का यह प्रथम सफर तुम्हारे साथ मैं एक ख़त के माध्यम से तय करना चाहता हूँ. वास्तविकता तो...
 पोस्ट लेवल : पापा की चिट्ठी
जेन्नी  शबनम
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पापा, तुमसे ढ़ेरों शिकायत है। मैं बहुत गुस्सा हूँ, बहुत बहुत गुस्सा हूँ तुमसे। मैं रूसी (रूठी) हुई हूँ। अगर तुम मिले तो तुमसे बात भी नहीं करूँगी। पापा, तुमको याद है, मैं अक्सर रूस (रूठ) जाती थी और तुम मुझे मनाते थे। इतनी भी क्या जल्दी थी तुम...
 पोस्ट लेवल : पापा
सतीश सक्सेना
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अर्थ अनर्थ में ,अक्सर बेटा !शब्द अर्थ,रूपान्तर बेटा !क्रूर, कुटिल, सूखे पत्थर में , धड़कन,न तलाश कर बेटा !सूख गए , तालाब प्यार केअब न रहे, पद्माकर बेटा !पथरीले पहाड़ में तुमको खूब मिलेंगे,निरझर बेटा !अच्छे दिन का नहीं भरोसा उम्मीदें...
गौतम  राजरिशी
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स्मृतियों के पन्ने एकदम से मचलते हैं और शुरुआती कुछ पन्नों को छोड़ कर बारिश से सराबोर एक पन्ना खुलता है | उस रोज़ बारिश ऐसी थी...ऐसी थी बारिश कि गाँव की पगडंडियाँ बह रही थीं | कितने साल बीत गए उस झमट कर उमड़ी बरसात के ? गिनता है वो लड़का उँगलियों पर तो गिनती तीस प...
 पोस्ट लेवल : पापागिरी