ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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                                           प्रति पल आँखें चुराती हूँ कविता से,  भाग्य देखो ! उसका,  सामने आ ही जाती है वह, कभी पाय...
मुकेश कुमार
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"या देवी सर्वभूतेषु...."गूंजती आवाज के साथजैसे ही शुरुआत की प्रार्थना कीपर नाद अनुनाद में बंध करबिना किसी मुकम्मल गूँज केधप्प से दब कर रह गयी प्रार्थना!बेशक रही होअंतर्मन से निकली आवाजपर, सिसकती रुंधी हुईकिसी दूर बैठी लड़की की आवाज केहल्के से रुदन में खो गयी प्रार्थ...