ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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विश्वास के हल्के झोंके से  पगी मानव मन की अंतरचेतना छद्म-विचार को खुले मन से धारणकर स्वीकारने लगी, हया की पतली परत  सूख चुकी धरा के सुन्दर धरातल पर जिजीविषा पर तीक्ष्ण धूप बरसने लगी | अंतरमन में उलीचती स्नेह सर...
घुघूती  बासूती
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बुधवार की शाम हम घर आ रहे थे। बूँदाबादी हो रही थी। हम उस इलाके से निकल रहे थे जहाँ बहुत से इन्फोर्मेशन टेक्नॉलोजी के दफ्तर हैं। शाम को जबर्दस्त ट्रैफिक हो जाता है। सड़क के दूसरी तरफ एक मोटरसायकिल की दुर्घटना दिखी। अवश्य कोई युवा होगा या होगी। मन ही मन मनाया कि चोट अ...