ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
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अंततः इंतज़ार समाप्त हुआ , विधि, गौरव की पुत्री मिट्ठी ने, आज (3April) म्युनिक, जर्मनी में जन्म लिया और मुझे बाबा कहने वाली इस संसार में आ गयी !मिट्ठी का स्वागत है अपने घर में , ढेरों प्यार से !गुलमोहर ने भी बरसाए लाखों फूल गुलाल के !नन्हें क़दमों की आहट से,दर्द न जा...
सतीश सक्सेना
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अर्थ अनर्थ में ,अक्सर बेटा !शब्द अर्थ,रूपान्तर बेटा !क्रूर, कुटिल, सूखे पत्थर में , धड़कन,न तलाश कर बेटा !सूख गए , तालाब प्यार केअब न रहे, पद्माकर बेटा !पथरीले पहाड़ में तुमको खूब मिलेंगे,निरझर बेटा !अच्छे दिन का नहीं भरोसा उम्मीदें...
सतीश सक्सेना
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अगर परिवार में कुछ समय से बिना कारण एक घातक लड़ाई का वातावरण तैयार हो चुका हो तो आपस में न लड़कर शांत मन से तलाश करें कि घर में कोई भेड़िया तो नहीं आ गया जिसे आपने कुत्ता समझकर घर की चौकीदारी ही सौंप दी हो !वही कहलायेंगे शेरे जिगर रह कर गुफाओं मेंअकेले जंगलों में भी ज...
सतीश सक्सेना
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 स्नेही दिनेशराय द्विवेदी  (फेस बुक पर ) जी के एक कमेंट ने यह पोस्ट लिखने को विवश होना पड़ा " बड़े भाई घुूटनों के कार्टिलेज का ध्यान रखना। मैं उन्हें बरबाद कर चुका हूँ। बस चैक कराते रहना। शुभकामनाएँ!इच्छा शक्ति की कोई कमी नहीं। अभी भी वह तो एवरेस...
सतीश सक्सेना
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आम आदमी भी कितने अरमान छिपाए बैठा है !बुझती नज़रों में कितने, तूफ़ान छिपाए बैठा है !धनाभाव भी तोड़ न पाया साहस बूढी सांसों का, सीधी साधी आँखों में अभिमान छिपाए बैठा है !चले गए लोगों के कर्जे कौन अदा कर पाया है !अपने पुरखों के कितने,अहसान छिपाए बैठा है !कबसे बुआ न...
सतीश सक्सेना
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पापा के कन्धों पै चढ़केचन्दा तारे सम्मुख देखे !उतना ऊंचे बैठे  हमने,सारे रंग , सुनहरे  देखे !उस दिन हमने सबसे पहले, अन्यायी को मरते देखा !शक्तिपुरुष के कंधे चढ़ कर हमने रावण गिरते देखा !उनके बाल पकड़कर मुझको सारी बस्ती बौनी लगती !गली...
सतीश सक्सेना
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कितनी बार सबेरे माँ ने , दरवाजा खटकाया होगा !और झुकी नज़रों से, तेरे आगे, हाथ फैलाया होगा !वे भी दिन थे जब अम्मा की,नज़र से सहमा करते थेसबके बीच डांट के कैसे उनको चुप करवाया होगा !यही बहिन थी,जो भाई के लिए,सभी से लडती थी !तुमने उसको,फूट फूट...
सतीश सक्सेना
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अगर हिमालय ले अंगड़ाई,कैसे भार संभाल सकोगे !सूरज के,नभ से बरसाए क्या अंगार, संभाल सकोगे !सृजनमयी के पास , अनगिनत रत्नों के भंडार भरे हैं !मैं गंगा को ला तो दूंगा,पर क्या धार संभाल सकोगे ?सारे जीवन हमने सबको, दिल में बसाकर रखा है !मर जाने पर...
सतीश सक्सेना
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"बेटा मैंने वह ऍफ़ डी  तुड़वा  कर सारे पैसे निकाल लिए तुम भी अपनी बीबी के साथ हिल स्टेशन जा सकते हो....."               उसी दिन दे देते तो दोनों भाइयों के साथ ही चला जाता न  तब सबके सामने इतनी गाली गलौज...
सतीश सक्सेना
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यह रचना समर्पित है उन  बच्चों को, जो पढना चाहते हैं , मगर ध्यान नहीं लगा पाते , उन्हें चाहिए कि  कछुवा और खरगोश की कहानी ध्यान से समझें , प्रतिद्वंदी की तेजी से बिना घबराए , मुकाबले में , बिना हिम्मत हारे , लगातार मेहनत  करना सीखें , चाहे धीमे ही सही...