ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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लिखना छोड़ा नहीं है। नया घर सजाया है। मन तो नहीं था पर क्या करूँ, यहाँ भी बता रहा हूँ। एकएक कर बताने से अच्छा तरीका यही लगा। आप सबको नया पता बताता चलूँ। जो लोग मेरे यहाँ से जाने के बाद से नाराज़ हैं, उनका हमारा साथ और आगे तक जाये, यही मन में दिल में दिमाग में है। करन...
Shachinder Arya
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पता नहीं यह दिन कैसे हैं? कुछ भी समझ नहीं आता। मौसम की तरह यह भी अनिश्चित हो गये हैं जैसे। जैसे अभी किसी काम को करने बैठता हूँ के मन उचट जाता है। खिड़की पर पर्दे चढ़ाकर जो अंधेरा इन कम तपती दुपहरों में कमरे में भर जाता है, लगता है, वहीं किसी कोने से दाख़िल होकर मेरे म...
राजीव कुमार झा
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पुरानी डायरी के फटे पन्ने अनायास आ जाते हैं सामने बीती यादों को कुरेदती दुःख - दर्द को सहेजती बेरंग जिंदगी को दिखा जाते पुरानी डायरी के फटे पन्नेबीते लम्हों को भुलाना गर होता इतना आसां कागजों पर लिखे हर्फ़ को मिटाना होता गर आसां जिंदगी न होती इतनी बेरंग इन्द्रधनुषी...
ललित शर्मा
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