ब्लॉगसेतु

sanjay krishna
275
अपर बाजार के भीड़-भाड़ इलाके में सौ साल से एक पुस्तकालय चुपचाप अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। गोविंद भवन के दूसरे तल्ले पर चल रहे इस पुस्तकालय में कभी रांची के साहित्यकारों का जमघट लगता था। यहीं से कहानी के प्लाट निकलते थे, विचारों की सरिता निकलती थी। पर, अब बेह...
 पोस्ट लेवल : संतुलाल पुस्तकालय
usha kiran
529
लेखनी और तूलिका का मिलन...उषा किरण============================"कहते हैं एक चित्र हजार शब्दों की ताक़त रखता है। ऐसे में अगर चित्रों को दमदार शब्दों का भी साथ मिल जाए, तो फिर इस रचनात्मक संगम से निकली कृति सोने पर सुहागा ही है।" ये शब्द हैं प्रख्यात गायक कुमार विश्वा...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक - समीक्षा
kumarendra singh sengar
19
लिखने को बहुत कुछ है मगर अक्सर होता है कि जैसे ही लिखने के लिए बैठा जाए वैसे ही सब गायब हो जाता है. सब कुछ याद रहने के बाद भी कुछ समझ नहीं आता कि क्या लिखा जाये. इसी उधेड़बुन में समय निकल जाता है. लिखने और न लिखने के बीच की स्थिति इतनी विचित्र है कि समझ नहीं आता कि...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक
जेन्नी  शबनम
518
'लम्हों का सफ़र' को देखते ही मन ख़ुशी से झूम उठा। पुस्तक को हाथ में लेते ही एक अजीब-सा रोमांच और उत्साह महसूस हुआ। मेरी क्षमता, योग्यता और सृजन को जैसे मैंने हाथों में पकड़ रखा हो। यूँ मेरी 25 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो साझी पुस्तक है। लेकिन यह मे...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक विमोचन
संतोष त्रिवेदी
116
पुस्तक मेले में घुसते ही ‘वो’ दिखाई दिए।मैं कन्नी काटकर निकलना चाहता था पर उन्होंने पन्नी में लिपटी अपनी किताब मुझे पकड़ा दी।फिर फुसफुसाते हुए बोले, ‘अब आए हो तो विमोचन करके ही जाओ।तुम मेरे आत्मीय हो।आपदा में अपने ही याद आते हैं।’ ऐसा कहते हुए वे मुझे साहित्य में उ...
sanjiv verma salil
5
लावणी*छंद विधान: यति १६-१४, समपदांती द्विपदिक मात्रिक छंद, पदांत नियम मुक्त।पुस्तक मेले में पुस्तक पर, पाठक-क्रेता गायब हैं।थानेदार प्रकाशक कड़ियल, विक्रेतागण नायब हैं।।जहाँ भीड़ है वहाँ विमोचन, फोटो ताली माला है।इंची भर मुस्कान अधर पर, भाषण घंटों वाला है।।इधर-उधर ता...
 पोस्ट लेवल : लावणी पुस्तक मेला
अजय  कुमार झा
817
#विश्वपुस्तकमेला 2019मैं दिल्ली के लगभग हर पुस्तक मेले में ,एक पाठक जिसे किताबें खरीदने और पढ़ने का जुनून है,  की हैसियत से जरूर शिरकत करने का प्रयास करता हूँ और अधिकाँश बार सफल भी होता  हूँ | शुरआती दिनों में हिंदी साहित्य  की सिर्फ इतनी समझ थी कि तम...
kumarendra singh sengar
19
अपनी उम्र के चार दशक गुजारने के बाद आत्मकथा लिखना हुआ. इसमें अपने जीवन के चालीस वर्षों की वह कहानी प्रस्तुत की गई जिसे हमने अपनी दृष्टि से देखा और महसूस किया. कुछ सच्ची कुछ झूठी के रूप में आत्मकथा कम अपनी जीवन-दृष्टि ही सामने आई. व्यावसायिक रूप से, प्रकाशन की आर्थि...
उन्मुक्त हिन्दी
103
यह चिट्ठी, रॉबर्ट ओपेनहाइमर, उनके बारे में एक दिलचस्प लेख, उनका गीता प्रेम  और रॉबर्ट जुंगक की लिखी पुस्तक 'Brighter than Thousand Suns' के बारे में है।आइंस्टाइन और रॉबर्ट ओपेनहाइमर रॉबर्ट ओपेनहाइमर को परमाणु बम के पिता के रूप में जाना जाता है। यहां पर, उन पर,...
shashi purwar
164
*जोगिनी गंध**पुस्तक समीक्षा/ डॉ. शैलेंद्र दुबे**कवयित्री के शब्दों में संवेदनाएं जोगन ही तो हैं जो नित नए भावों के द्वार विचरण करती हैं. भावों के सुंदर फूलों की गंध में दीवानगी होती है, जो मदहोश करके मन को सुगंधित कर देती है. साहित्य के अतल सागर में अनगिनत मोती हैं...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक - जोगनी गंध