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संजीव तिवारी
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अगसदिया का नवीनतम अंक मेरे हाथ मे है, छत्तीसगढ़ के असल कलम के सिपाही डॉ. परदेशीराम वर्मा लेखन के मोर्चे में डटे रहने वाले ऐसे अजूबे सिपाही हैं जो निरंतर लेखन कर रहे हैं। विभिन्न विधाओं और आयामो में लिखते हुए वे, उनका संग्रह आदि के माध्‍यम से लगातार प्रकाशन भी प्रस्त...
संजीव तिवारी
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वर्तमान छत्तीसगढ़ के गाँवों में कारपोरेट की धमक और तद्जन्य शोषण और संघर्ष की महागाथा है कामेश्वर का उपन्यास ‘बिपत‘। इसमें गावों में चिरकाल से व्याप्त समस्याओं, वहाँ के रहवासियों की परेशानियों एवं गाँवों से प्रतिवर्ष...
संजीव तिवारी
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तापस चतुर्वेदी हिन्दी कथा की दुनिया में एक नया नाम है जिनकी छः कहानियों का एक संग्रह 'सेकेंड मेन' अभी-अभी प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह में 'ज्यादा हरा मुल्क', 'नट', 'नदी के किनारे', 'दादी का घर', 'एक शरीफ विधुर के सपने' और 'सरासम' शीर्षक से कहानियाँ संग्रहित है। लेखक...
संजीव तिवारी
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शिवना प्रकाशन द्वारा हाल में प्रकाशित नये जमाने की कहानी संग्रह 'व्हॉट्स-एपिया रोमांस' को 'रोमांस कभी खत्म नहीं हो सकता है' से '.. रंगरेलियां मनाते पकड़े गए अपने बाप की ..' तक, एक ही सिटिंग में पढ़ गया। कुछ सिर से ऊपर भी गुजरी, तो फिर-फिर पढ़ा, और जितनी बार पढ़ा, न...
संजीव तिवारी
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कहते है कि लेखन में कोई बड़ा छोटा नहीं होता। रचनाकार की परिपक्वता को रचना से पहचान मिलती है। उसकी आयु या दर्जनों प्रकाशित पुस्तके गौड़ हो जाती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैं आज का चौपाल पढ़ने लगा। शीर्षक 'अतिथि संपादक की कलम ले' के नीचे सुदर्शन व्यक्तित...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढ़ी के जनप्रिय कवि लक्ष्मण मस्तुरिया की कालजयी कृति 'सोनाखान के आगी' के संबंध में आप सब नें सुना होगा। इस खण्‍ड काव्‍य की पंक्तियों को आपने जब जब याद किया है आपमें अद्भुत जोश और उत्‍साह का संचार अवश्‍य हुआ होगा। पाठकों की सहोलियत एवं छत्‍तीसगढ़ी साहित्‍य के...
संजीव तिवारी
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अभी हाल ही में द्रोपदी जेसवानी की एक कविता संग्रह ‘अंत: प्रेरणा’ आई है। संग्रह की भूमिका डॉ. बलराम नें लिखी है, जिसमें द्रोपदी जेसवानी की संवेदशील प्रवृत्ति के संबंध में बताते हुए वे लिखते हैं कि उनकी रचनाओं में वेदना और संवेदना के छायावादी चित्र झलकते हैं। डॉ. बलर...
संजीव तिवारी
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धर्मेंद्र निर्मल छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्य मे एक जाना पहचाना युवा नाम है। धर्मेंद्र निर्मल आजकल व्यंग, कहानी, कविता और छत्तीसगढ़ी के अन्यान्य विधाओं पर लगातार लेखन कार्य कर रहे है। उन्होंनें लेखनी की शुरुआत छत्तीसगढ़ी सीडी एल्बमों मे गाना लेखन के साथ आरंभ किया था।...
संजीव तिवारी
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छत्तीसगढ़ की एक 10वीँ पढी अनुसूचित जाति की ग्रामीण लड़की की कविताओं के दो कविता संग्रह, पिछले दिनों पद्मश्री डॉ सुरेन्द्र दुबे जी से प्राप्त हुआ। संग्रह के चिकने आवरणों को हाथों में महसूस करते हुए मुझे सुखद एहसास हुआ। ऐसे समय मेँ जब कविता अपनी नित नई ऊंचाइयोँ को छू...
संजीव तिवारी
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पारम्‍परिक साहित्‍य में प्रेम एवं विरह, गद्य एवं पद्य की मूल विषय वस्‍तु रही है. विभिन्‍न महान कवि एवं लेखकों नें इसे केन्‍द्र में रखकर साहित्‍य की रचना की है. रचनाकारों के इसी सृजन से भारतीय साहित्‍य में भी विभिन्‍न नायक-नायिकाओं की कहानियॉं उपलब्‍ध है. इसी क्रम म...