ब्लॉगसेतु

वंदना अवस्थी दुबे
362
पिछले एक साल में बहुत सारी पुस्तकें इकट्ठा हो गयीं, पढ़ने के लिये, और फिर लिखने के लिये. न बहुत पढ़ पाई, सो लिख भी नहीं पाई. अब एक-एक करके पढ़-लिख रही हूं. रश्मि का कहानी-संग्रह, ’बन्द दरवाज़ों का शहर’ प्रकाशित होते ही ऑर्डर कर दिया था. कुछ कहानियां पढ़ भी ली थीं, लेकिन...
वंदना अवस्थी दुबे
362
विश्व साहित्य में अनुवाद की श्रृंखला प्राचीन युग से ही गतिशील है. हिन्दी साहित्य में भी अनुवाद विधा को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. इसका श्रेय अनुवाद की गुणवत्ता को ही दिया जा सकता है. देशी-विदेशी बहुत सारी भाषाओं के स्तरीय ग्रंथों के अनुवाद, इधर कुछ वर्षों से हिंद...
 पोस्ट लेवल : पुस्तक समीक्षा-