ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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Yashoda Agrawal
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ईसा पूर्व और पश्चात जैसेभावनाओं को बाँटने की सुविधादेती नहीं हैं ज़िन्दगीकिसी पुरातत्त्व अवशेष जैसेअचानक उभर आती हैं स्मृतियाँकुछ पाषाण हो चुकींकुछ अभी भी कंकालवो जो पहली बार दरका था विश्वासअब भी किसी पर नहीं हो पातावो जो पेचीदा तरीकों से घुलनशील हैं यादेंउनका एक रं...
sanjay krishna
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सूर्य पूजा की उपासना पूरी दुनिया में लोग करते हैं। दुनिया के आदिवासी भी अलग-अलग नामों से सूर्य की उपासना करते हैं। गायत्री मंत्र वस्तुत : सविता देवता की ही उपासना का मंत्र है। झारखंड के आदिवासी समुदाय भी सिंगबोंगा नाम से भगवान सूर्य की ही उपासना करते हैं। बिहार और...
Yashoda Agrawal
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रात भर नींदहल्के पत्ते सी तैरती हैआँखों के पोखरों मेंवक़्त कर्मठ श्रमिकगहरे करता जा रहा हैकाले घेरेभोर भारी हैकिसी अनमनी गर्भिणी सीघसीटती खुद कोजानते हुए एक और दिन होगामृत प्रसवदिन लावारिस लाश सामर कर भी नहीं मरताशोर और भीड़उठा नहीं पातेमेरे अकेलेपन की चट्टानशाम सुन्...
Yashoda Agrawal
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कैसा होता होगाआत्मा का शरणार्थीहो जानागुड़ में, साग मेंहवा मेंढूंढना सरहद पार की खुश्बूऔर घंटों हर-रोज़आँखें बंद कर देखनाअपने बचपन का घरठिठुरते हाथों सेशालें स्वेटरें बेचतेउम्मीद की आखरी डोर कोहिमालय के उस पारपोटाला के गुम्बदों सेबांधे रखनाटिमटिमाती नीली-पीलीबस्तियों...
सुशील बाकलीवाल
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      अभी कुछ समय पूर्व एक रेलयात्रा के दौरान सामने की बर्थ पर बैठी एक माँ और उसकी बच्ची में कुछ रोचक सा देखने को मिला और वो यह कि उसकी माँ जब मेरी पत्नी सहित अन्य महिलाओं से बात कर रही थी तब उसकी छोटी बच्ची उसकी उम्र की बाल-कहानियां पढ रही थी । उसकी...
Yashoda Agrawal
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हल्की बर्फ़ मेंएक हाथ थामे रखता हैघुमावदार पगडंडियों परदिल फिसले तो फिसलेतुम न फिसलो !****************उसके होंठ चुनते हैंमेरे होंठों सेबर्फ़ के ताज़ा फ़ाहेबर्फ़ गर्म और मीठीमैंने पहली बार चखी.-पूजा प्रियंवदा
Yashoda Agrawal
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चमकौर का युद्ध1704 में 21, 22, और 23 दिसम्बर को गुरु गोविंद सिंह और मुगलों की सेना के बीच पंजाब के चमकौर में लड़ा गया था। गुरु गोबिंद सिंह जी 20 दिसम्बर की रात आनंद पुर साहिब छोड़ कर 21 दिसम्बर की शाम को चमकौर पहुंचे थे, और उनके पीछे मुगलों की एक विशाल सेना जिसका न...
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--गोवर्धन पूजा करो, शुद्ध करो परिवेश।गोसंवर्धन से करो, उन्नत अपना देश। --अन्नकूट के दिवस पर, करो अर्चना आज।गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।।-- श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।इस अवसर पर आप भी, बन जाओ गोपाल।।-- गौमाता से...
sanjiv verma salil
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दुर्गा पूजा परंपरा : सामाजिक उपादेयताआचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ [लेखक परिचय: जन्म २०-८-१९५२, आत्मज - स्व. शांति देवी - स्व. राजबहादुर वर्मा, शिक्षा - डिप्लोमा सिविल इंजी., बी. ई., एम.आई.ई., एम.आई. जी.एस., एम.ए. (अर्थशास्त्र, दर्शन शास्त्र) विधि स्नातक, डिप्लोमा...