ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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चमकौर का युद्ध1704 में 21, 22, और 23 दिसम्बर को गुरु गोविंद सिंह और मुगलों की सेना के बीच पंजाब के चमकौर में लड़ा गया था। गुरु गोबिंद सिंह जी 20 दिसम्बर की रात आनंद पुर साहिब छोड़ कर 21 दिसम्बर की शाम को चमकौर पहुंचे थे, और उनके पीछे मुगलों की एक विशाल सेना जिसका न...
Yashoda Agrawal
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कितनी अँधेरी रातों के बाद कितने अकेले सफ़र तमाम परिंदे ने कहीं फ़िर आसरे की उम्मीद कर ली थीघर ने कहा तू लौट जा कोई और अब रहता है यहाँ बाकि है तन्हा सफ़र तेरा !लौटा है सफ़र में अकेला परिंदा फ़कीर रूह न किसी की न कहीं इसका बसेर...
Yashoda Agrawal
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याद चारकोल स्केच है धीरे-धीरे मन की पृष्ठभूमि में घुलने लगती हैतुम्हारा छूना एक स्थायी गोदना रूह के माथे पर धुंधलाने लगा हैआसमान काले और सफ़ेद के बीच नीला होना भुला चुका हैतुम्हारी मोहब्बतदीमक बन ख़ोखलाकर रही है मेरे दिल को-पूजा प्र...
Yashoda Agrawal
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मुझ तक आने से पहले ही खर्च चुके थे तुम अपने सारे उम्र भर के वादेगर्मी की किसी दोपहर किसी नीम अँधेरे कमरे में जो होठों से मेरे माथे पर रखा था वो बिछोह था हमेशा काअमृता को पढ़ती हूँ गला भर आता है तुमसे बेतरतीब बालों वाले किसी छो...
Yashoda Agrawal
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शाम को जब घरों में होती है रौशनी देखना मेरी उन आँखों से जिनका कभी घर न हुआबच्चों की हथेलियाँ थामना मेरे उन हाथों से जिन्होंने दफन किया कई अपनेअलविदा की घड़ी महसूस करना मेरे उस दिल से जो धड़कता रहा तुम्हारे जाने के बाद भीफूल नहीं पसंद मुझ...
Yashoda Agrawal
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उद्यम से स्वादविहीन आखिरी रोटी खाती है उसकी रसोई के विश्लेषण में कहे सब कड़वे शब्द चिपके हैं तालू सेसुन्दर, महंगी साड़ी उसने बचा रखी है किसी विशेष अवसर के लिए जब कि मर चुके हैं उसके देह के सारे त्यौहार तुम्हारे बिस्तर मेंब...
Yashoda Agrawal
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Picture courtesy : @Shimlalife Twitter with permissionवहाँ कहीं एक सेब के बगीचे से घिरा एक पुराना घर है वहां एक बचपन दफ़्न हैमेरी नानी का पहाड़ी गुनगुनाना गुम है मेरे नाना की कहानियाँ खो गयी हैंवो पगडंडियां अब मुझे भूल गयीं हैं&nbsp...