दोहा सलिला पूनम नम नयना लिए, करे काव्य की वृष्टि।पूर्णिमा रस ले बिखर, निखर रचे नव सृष्टि।।*प्रणय पत्रिका पूर्णिमा, प्रणयी मृग है चाँद।चंचल हिरणी ज्योत्सना, रही गगन को फाँद।।*http://divyanarmada.blogspot.in/