ब्लॉगसेतु

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--सेवा का व्रत धार लिया है।मानवता से प्यार किया है।। -- रंग बहुत थे ढंग बहुत थे,कभी न उल्टा पथ अपनाया,जिसको अपना मीत बनाया,उसका पूरा साथ निभाया,हमने सूई-धागा लेकर,बैरी का भी वक्ष सिया है।मानवता से प्यार किया है।। --झंझावातों के दलदल में, कभी किसी...
Manav Mehta
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देर रात जब मोहब्बत नेदस्तक दी चौखट परमैनें अपनी रूह को जलादिल को रोशन कर दियालफ्ज़ दर लफ्ज़ चमकने लगे ज़हन मेंमैनें एक एक करकेइश्क़ के सभी हर्फ़ पढ़ डालेइश्क़ मेहरबान हुआ मुझ परदुआएं कबूल हुईं मेरीहर्फे- मोहब्बत मेंतेरा नाम लिखा पाया...!!देर रात जब मोहब्बत नेदस...
Manav Mehta
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बरसों पहलेएक खेल खेला करते थे हम लोगविष- अमृत नाम था शायद...!!भागते - भागते जब कोईछू लेता था किसी कोतो विष कहा जाता थाऔर वो एक टक पुतले के जैसेरुक जाता था....ना हिलता था ना कुछ बोल पाता था...फिर जब कोई और उसे छू लेता तोअमृत बन जाता थाखेलता था पहले के जैसेभागता था.....
Manav Mehta
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मैं कुछ कुछ भूलता जाता हूँ अबमेरी ख़्वाहिशें, मेरी चाहतमेरे सपने, मेरे अरमानमैं कुछ कुछ भूलता जाता हूँ अब...देर शाम तक छत पे टहलनाडूबते सूरज से बातें करनानीले कैनवस पर रंगों का भरनामैं कुछ कुछ भूलता जाता हूँ अब...किताबों के संग वक़्त बितानाहर शायरी पे 'वाह' फ़रमानाहर...
Manav Mehta
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सहरा कभी जंगल होये तो होये कैसेदिल-ए-बंजर पर मोहब्बत का फूल बोये कैसे…चले आओ कि अब तो शाम ढलने लगीबिन तेरे हम रातों को सोये कैसे...मेरे अश्कों से आज मेरा घर भी डूब गयातुम ही बताओ कि ये तूफान खामोश होये कैसे..ए जान हमारे मिलने का कोई चारा करोबेसबब इक दूजे का साथ खोय...
 पोस्ट लेवल : दिल ऐ जान प्यार
Manav Mehta
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जाने कहां गई वो शाम ढलती बरसातेंहाथों में हाथ डाल जब दोनों भीगा करते थेजाने कहाँ गए वो सावन के झूलेइक साथ बैठ जब दोनों झूला करते थेअब तो बस तन्हाई है और तेरी यादों का साथजाने कहाँ गए वो लम्हें जो तेरे साथ बीता करते थेवो लिखना मेरा कागज़ पे गज़लेंऔर कागज़ की...
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--मात-पिता के चरण छू, प्रभु का करना ध्यान।कभी न इनका कीजिए, जीवन में अपमान।१।--वासन्ती मौसम हुआ, काम रहा है जाग।बगिया में गाने लगे, कोयल-कागा राग।२।--लोगों ने अब प्यार को, समझ लिया आसान।अपने ढंग से कर रहे, प्रेमी अनुसंधान।३।--खेल हुआ अब प्यार का, आडम्बर से युक...
shashi purwar
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नमस्कार मित्रों आज दो कुण्डलिया छंद आपके समक्ष - फागुन आयो री सखी :) फागुनी दिल१मौसम ने पाती लिखी, उड़ा गुलाबी रंगपात पात फागुन धरे, उत्सव वाले चंगउत्सव वाले चंग, चटक गुलमोहर फूलाजीवन में आनंद, पड़ा वृक्षों पर झूलाकहती शशि यह सत्य, अनोखा मन में संगमधरती का...
kumarendra singh sengar
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प्यार, प्रेम, इश्क ऐसे शब्द हैं जिन पर कहीं न कहीं चर्चा देखने-सुनने को मिल जाती है. कोमल भावनाओं को अपने में समेटे इन शब्दों के साथ समाज बहुत ही कठोरता से अपना व्यवहार करता है. प्यार को लेकर आये दिन हमें स्वयं हमारे कुछ मित्रों की तरफ से अनेक सवालों से दो-चार होना...
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--चाहे कोई कल्प हो, या हो कोई काल।माता निज सन्तान को, रही प्यार से पाल।।-- सुख-दुख दोनों में रहे, कोमल और उदार।कैसी भी सन्तान हो, माता करती प्यार।। --पीर पराई झेलना, बहुत कठिन है काम।कलियुग में कैसे भला, पैदा होंगे राम।।-- भावनाओं...