ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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  नितांत निर्जन निरस सूखे अनमने विचार शून्य परिवेश में पनप जाती है वह भी,  जीवन की तपिश सहते हुए भी,  मुस्कुरा उठती है वह, महक जाते हैं देह पर उसके भी,  आशा के सुन्दर सुमन,  स्नेह...
अनीता सैनी
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प्रदूषण के प्रचंड प्रकोप से ,  दम तोड़ता देख धरा का धैर्य,   बरगद ने आपातकालिन सभा में,   आह्वान नीम-पीपल का किया।  ससम्मान सत्कार का ग़लीचा बिछा, बुज़ुर्ग बरगद ने दिया आसन प्रभाव का,  विनम्र भाव से रखा...
अनीता सैनी
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सुख-समृद्धि यश-वैभव दयावंत,  वैभवचारी-सा चतुर्दिश सत-उजियारा,  प्रिय प्रीत में प्रतीक्षामान थीं,   उत्सुक आँखें अनिमेष भोर कीं,  तन्मय-सी ताकती तुषार-बूंदें,  मोहक नवल नव विहान को |  खग-वृंद के कलनाद...
अनीता सैनी
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चाँद सितारों से पूछती हूँ हाल-ए-दिल,  ज़िंदा जल रहे  हो परवाने की तरह ! मरणोपरांत रोशनी आत्मा की तो नहीं,    क्यों थकान मायूसी की तुम पर नहीं आती |हार-जीत का न इसे खेल समझो,  अबूझ पहेली बन गयी है ज़िंदगी, शमा-सी जल रह...
ऋता शेखर 'मधु'
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1नभ सिन्दूरीचहचहाहट सेपुलका नीड़2सांध्य नायिकाफैला रही आँचललौटे पथिक3साँझ की बेलाताकता रहा चाँदजो है अकेला4उठो मुनियादीया बाती लगाओसाँझ आयी है5बोझिल तनशाम की आहट सेहुलसा मन6वृद्ध है दिनसाँझ के साथ आईसहेली निशा
mahendra verma
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प्रकृति ने मनुष्य को स्वाभाविक रूप से तार्किक बुद्धि प्रदान की है । मनुष्य की यह क्षमता लाखों वर्षों की विकास यात्रा के दौरान विकसित हुई है । लेकिन सभी मनुष्यों में तर्कबुद्धि समान नहीं होती । जिनके पास इसकी कमी थी स्वाभाविक रूप से उनमें आस्थाबुद्धि विकसित हो गई ।त...
mahendra verma
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दुनिया भर के वैज्ञानिक बार-बार यह चेतावनी देते रहे हैं कि निकट भविष्य में पृथ्वी पर जीवन के लिए बुनियादी आवश्यकताओं- शुद्ध वायु, जल और भोजन के अभाव का संकट अवश्यंभावी है । कुछ देशों में इनका अभाव अभी से दिखाई दे रहा है । प्रकृति ने इन बुनियादी आवश्यकताओं की सतत उपल...
जेन्नी  शबनम
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प्रकृति (20 हाइकु)   *******   1.   प्यार मिलता   तभी खिलखिलाता   प्रकृति-शिशु।   2.   अद्भुत लीला   प्रकृति प्राण देती   संस्कृति जीती।   3.   प्रकृत...
 पोस्ट लेवल : हाइकु प्रकृति
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केदारनाथ जलप्रलय ---माता प्रकृति का श्राप एवं जगत पिता द्वारा दिया गया दंड ---      वह सर्वश्रेष्ठ, जगतपिता अपनी सुन्दरतम सृष्टि, प्रकृति के विनाश के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना, अपने पुत्र मानव को भी नहीं छोड़ता उसके अपराधों का दंड देने...
सुमन कपूर
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भर दो हर दिल में मोहब्बत का रंग, मेरे मौला कि मज़हबी रंग गुलाल-ए-अमन में बदल जाए !!सु-मन