ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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पावन प्रीत के सुन्दर सुकोमल सुमन, सुशोभित स्नेह से करती साल-दर-साल,  अलंकृत करती है हृदय में प्रति पल वह,  फिर यादों का कलित मंगलमय थाल |  बाती बना जलाती साँसें कोअखंड ज्योति-सी, जीवन में प्...
Manoj Kumar
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आओ हिंदी दिवस मनाऍं- करण समस्तीपुरीस्वाभिमान की भाषा हिंदी। जन मन की अभिलाषा हिंदी। सुंदर इसकी है अभिव्यक्ति। इसमें है सम्मोहन शक्ति। भारत के माथे की बिंदी। पुरस्कार देती है हिंदी। चलो कहीं भाषण कर आएँ। कविता दोहा गीत सुनाएं।&nbsp...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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हाँ! मैं पुण्य प्रसून बाजपेयी हूँ!हाँ! मैं जनता के प्रतिएक नन्हीं-सी जवाबदेही हूँ।  पूँजी की आक्रामकता के दौर मेंपाखंड, अहंकार, दम्भ और दमन रोकने   हाँ! मैं एक कठोर-सी देहरी हूँ। पलायन, लाचारी, बेकारी के तूफ़ान मेंपत्रकारिता के मानदंड और आत्...
Bharat Tiwari
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अरे आप समझ नहीं रहे हैं… ये कितना महत्वपूर्ण मुद्दा है. आप संपादक हैं आप ही निर्णय लें, देश के लिए क्या ज़रूरी है ये तो समझें. आप देशहित को ध्यान में नहीं रखते. देखिये, वक़्त बदल रहा है, अब पुरानी समझ का कोई म...
Bharat Tiwari
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क्या बैंकों का घाटा। एनपीए की रकम। बट्टा खाते में डालने का सच सबकुछ चुनावी लोकतंत्र से जा जुड़ा है जहां पार्टी के पास पैसा होना चाहिये। खूब रुपया होगा तो प्रचार में कोई कमी नहीं आयेगी।— पुण्य प्रसून बाजपेयीचेहरा, संगठन, रईसी सब कुछ है पर वोट नहीं?वोट कम हो रहे है प...
Bharat Tiwari
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विपक्ष के जुड़ते तार तले, संघर्ष के उस पैमाने से समझा जा सकता है, जो पहली बार बिना पॉलिटिकेल फंड राजनीतिक संघर्ष कर रही है— पुण्य प्रसून बाजपेयी चौथे—बरस के जश्न तले चुनावी—बरस में बढ़ते कदमपरसेप्शन बदल रहा है तो फिर चेहरा-संगठन कहां मायने रखेगाबीते चार—बरस में...
Bharat Tiwari
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[full_width] ...इसीलिये तो लोकसभा-राज्यसभा में बहुमत के साथ यूपी में बीजेपी की सत्ता होने के बावजूद राम मंदिर बनेगा नहीं  — पुण्य प्रसून बाजपेयी2013-14 से 2018 के बीच क्या हो गया जो लगने लगा है कि देश की राजनीति करवट ले रही है। और आने वाले वक्त में राजनीत...
अनंत विजय
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हाल ही में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड जिसे आमतौर पर लोग सेंसर बोर्ड के नाम से जानते हैं, का पुर्नगठन किया गया और अध्यक्ष समेत कई सदस्यों को बदला गया। हटाए गए अध्यक्ष पहलाज निहलानी के कार्यकाल में फिल्मों के सेंसरशिप को लेकर काफी हो हल्ला मचता रहा। उनके विवादास्प...
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मित्रों।कवि देवदत्त "प्रसून" आज हमारे बीच नहीं हैं।लेकिन उनका साहित्य अमर रहेगा।--गत वर्ष 25 नवम्बर, 2014 को मेेरे अभिन्न मित्रदेवदत्त प्रसून का अचानक देहान्त हो गया था। -- कल 19 सितम्बर, 2015 को सायं 4 बजे से मेरे एम.ए. के साथी और अभिन्न मित्र स्व. देवदत्त प्रसून...
sahitya shilpi
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