ब्लॉगसेतु

केवल राम
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गत अंक से आगे.....आम जनमानस बोली में ही अपने भावों को अभिव्यक्त करने की कोशिश करता है, उसके जीवन का हर पहलू बोली के माध्यम से बड़ी खूबसूरती के साथ अभिव्यक्त होता है. हम अगर भाषा का गहराई से अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि भाषा में प्रयुक्त कुछ शब्द भाव सम्प्रेषण में...
Kheteswar Boravat
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विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) ............. कुम्भ,मेलों की भगदड़,केदारनाथ आदि में ग्लेशियरों का फटना आदि इन मानवीय दुर्व्यवस्थाओं के ही दुष्परिणाम हैं।वाराणासी की ताज़ातरीन भगदड़...
विजय राजबली माथुर
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प्रस्तुत लिंक पर चार साल की बच्ची के साथ उसके माता-पिता की उत्पीड़नात्मक कारवाई को देखा जा सकता है। http://hindi.eenaduindia.com/News/TopNews/2016/03/29181625/Parents-tied-hand-of-their-daughter-in-Aligarh.vpfआवश्यकता आविष्कार की जननी है। विज्ञान ने नित्य नए-नए...
विजय राजबली माथुर
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पाखंड-ढोंग-आडंबर को धर्म मानने के नतीजे हैं ये सब: भागवाताचार्य द्वारा कृत धर्म -कृत्य सदृश्य ही एक परिघटना 8-9 वर्ष पूर्व कमलानगर, आगरा में भी घटित हो चुकी है । वहाँ चैत्र नवरात्र का पाठ करने वाला पुरोहित यजमान महिला की सास का कत्ल करने के बावजूद  ...
रणधीर सुमन
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हमारे प्रधानमंत्री पूरी दुनिया में घूम.घूमकर 'मेक इन इंडिया' के लिए वैश्विक पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। वे ऐसी घोषणाएं भी कर रहे हैं जिनसे बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत की ओर आकर्षित हों और उन्हें लगे कि वे यहां मनमाफिक मुनाफा कमा सकती हैं। हाल में, प्रधानमंत्री...
Neeraj Kumar Neer
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दीवानी निर्झर बहेतटिनी तोड़े तटबंधवर्षा  के अनुराग मेंछिन्न भिन्न सब अनुबंधपत्र पत्र मोती झरेभूतल  सर्वत्र जलन्धहरीतिमा का सागर अनुपमेय प्रकृति प्रबंध.. धान्य गर्भ हीरक भरेअभिसारित हर्ष सुगंधप्रेम स्थापित  धरा करेमातृ - पुत्रक   संबंध॥  &nbs...
 पोस्ट लेवल : प्राकृतिक सौंदर्य
Ramesh pandey
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विकास और समृद्ध जीवन-शैली की ललक से पैदा हुए कार्बन उत्सर्जन तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को लेकर स्पष्ट समझ और निर्णय की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन से मानव जाति को बचाने के लिए अब भी हमारे पास समय है। देश के विभिन्न हिस्सों में भीषण गरमी और लू से दो ह...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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(नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर)त्रासदी प्रकृति के रौद्र परमानव संहार परहृदय व्यथितमन बेचैनसोच जड़कलम चुप हैनम आँखों सेमृत आत्माओं कोशत शत नमन हैनिश्छल हृदय सेश्रद्दांजलि अर्पण हैडा.राजेंद्र तेला,निरंतरभूकम्प,त्रासदी,प्राकृतिक विपदा30-09-05-2015Dr.Rajendra Tela"Niranta...
अजय  कुमार झा
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पिछले वर्ष जून में जब अचानक ही केदारनाथ की आपदा सब पर कयामत बनकर टूटी तो उस त्रासदी के प्रभाव से देश भर के लोगों ने झेला । कुदरत के इस कहर से जाने कितने ही परिवार हमेशा के लिए गुम हो गए , कितने बिखर कर आधे अधूरे बच गए , जाने कितने ही परिवार में बचे खुचे लोग मानसिक...