ब्लॉगसेतु

Atul Kannaujvi
0
— अतुल कन्नौजवीहे मनुष्यता के प्रतिपालक हे प्रति पालक हे मनुष्यताक्या भूल हुई क्या गलती है अब क्षमा करो हे परमपिता।अब राह दिखाओ दुनिया को मुश्किल सबकी आसान करोहे कायनात के संचालक सारे जग का कल्याण करो।ये कैसी विपदा है भगवन कैसा ये शोर धरा पर हैजो सदियों से जीवित है...
Meena Sharma
0
दुनिया ने जब जब दुत्कारातूने गले लगाया कान्हा,मैं अर्जुन सी भ्रमित हो गईगीता ज्ञान सिखाया कान्हा !!!सपनों की सच्चाई देखी,अच्छों की अच्छाई देखी,अपनेपन में छिपी, कुटिलता-स्वारथ की परछाईं देखी,कदम-कदम ठोकर खाकर भीपागल मन भरमाया कान्हा !!!सुख की खोज में दर-दर भटका,द्वा...
अनीता सैनी
0
अनासक्त भाव से भर जाऊँ हे ! प्रभु ऐसी  भक्ति दो। कर्मकष्ट सहूँ आजीवन बस मुझ में इतनी शक्ति दो। धूप द्वेष की न तृष्णा की साँझ समन्वय की भोर जगाए है। आरोह-अवरोह का अंत नहीं अंत समय तक मँडराए है। मन डिगे न मानवता से मेरा&nb...
 पोस्ट लेवल : प्रार्थना
सुशील बाकलीवाल
0
         हिंदू धर्म में यह परम्परा है कि किसी भी मंदिर में दर्शन के बाद बाहर आकर मंदिर की पेढी या ओटले पर दो मिनिट तो बैठना ही चाहिये । क्या आप जानते हैं कि इस परम्परा के पीछे कारण क्या है ?          &nbsp...
Roli Dixit
0
मैं तिनके-तिनके से बनेघर में रहूँ,या गुम्बदन&#236...
Meena Sharma
0
हार से बोझिल पगों को ,जीत का आह्वान देना !सोच को मेरी, प्रभु !सत्प्रेरणा का दान देना ।।प्रेम देना, स्नेह देना,किंतु मत अहसान देना !सत्य की कटु औषधि को,मधुरता, अनुपान देना ।।भीत, आशंकित हृदय की,आस्था को मान देना !पीड़ितों को, शोषितों को,करूणा का वरदान देना ।।आत्मबल क...
 पोस्ट लेवल : प्रार्थना
हिमांशु पाण्डेय
0
तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण हैखुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती हैजन्म-जन्म की रीती झोली भर जाती है।होना हो सो हो, वह चाहे जैसे खेलेउसका मन, दे सुला गोद में चाहे ले ले करो समर्पण कुछ न कभीं भी उससे माँगोबस उसके संक...
sanjiv verma salil
0
PRAYERध्यान, अध्यात्म आदि से संबंधित संस्था infinitheism की प्रार्थना भावानुवाद सहित प्रस्तुत हैFeeling thy presenceFeeling thy graceFeeling thy radianceYou are my source of faith and strengthYou are my path and destinationAnd I am always connected to YouNothing of...
मुकेश कुमार
0
"या देवी सर्वभूतेषु...."गूंजती आवाज के साथजैसे ही शुरुआत की प्रार्थना कीपर नाद अनुनाद में बंध करबिना किसी मुकम्मल गूँज केधप्प से दब कर रह गयी प्रार्थना!बेशक रही होअंतर्मन से निकली आवाजपर, सिसकती रुंधी हुईकिसी दूर बैठी लड़की की आवाज केहल्के से रुदन में खो गयी प्रार्थ...
sanjiv verma salil
0
मुक्तक *प्राण, पूजा कर रहा निष्प्राण की इबादत कर कामना है त्राण की वंदना की, प्रार्थना की उम्र भर- अर्चना लेकिन न की संप्राण की. साधना की साध्य लेकिन दूर था भावना बिन रूप ज्यों बेनूर थाकामना की यह मिले तो वह करूँ जाप सुनता प्रभु न लेकिन सूर था. नाम ले सौदा किया बेन...