ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सुनो प्रिये !मैं बहुत नाराज़ हूँ आपसेआपने आज फिर भेज दियेचार लाल गुलाब के सुन्दर फूलप्यारे कोमल सुप्रभात संदेश के साथमाना कि ये वर्चुअल हैं / नक़ली हैं लेकिन इनमें समायाप्यार का एहसास / महक तो असली हैनादाँ हूँ / प्रकृतिप्रेमी हूँ  / कवि हूँकदाचित...
PRABHAT KUMAR
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बांसुरी की ध्वनि मेंजब झंकार उठे मन सेवीणा की धार में सारीजब श्रृंगार सजे मन सेतो प्रिये तुम आना बसठहर जाए जमाना बसमिलन की अप्रतिम छविदौड़ उठे गईया तबआंगन में फूल खिलेहवा छू जाए हृदय जबमौन हों नदियां सारीचाँद तुम दिखो तबतो प्रिये तुम आना बसदेखना तुम तिरछी नजरों सेमु...
Ravindra Pandey
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साँझ घिर आने से पहले,------------***-----------साँझ घिर आने से पहले,घर को लौट आना प्रिये...रात की खामोशियाँ भी,बिन तेरे तनहा सी है...है अगर शिक़वा गिला तो,खुल के तुम बतला भी दो...मेरी ये छोटी सी दुनिया,बिन तेरे तनहा सी है...कुछ लकीरों से बनी,क़िस्मत की ये बाज़ीगरी...क...
अरुण कुमार निगम
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अधजल गगरी छलकत जाये प्राणप्रिये......कैसे  –  कैसे   मंजर    आये   प्राणप्रियेअपने    सारे    हुये   पराये   प्राणप्रिये |सच्चे  की  किस्मत  में  तम...
शिवम् मिश्रा
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आदरणीय ब्लॉगर मित्रों सादर नमस्कार,आज की एक झटपट बुलेटिन लेकर हाज़िर हुआ हूँ उम्मीद है कुछ असर तो डालने में कामयाब होगी ।अरुण अधर, नीले नयनमुख है चाँद चकोरप्रियेसी एक होगी ऐसीवो होगी मनभावन चित्त चोरआएँगी खुशियों की शाम भीहो ना ऐ दिल उदासहर गीत जीवन...
अरुण कुमार निगम
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मान जाओ प्रिये..... है मिलन की घड़ी मत करो हड़ब‌ड़ी | इतनी जल्दी तुम्हें जाने की क्या पड़ी | पास  बैठो  अजी दूर क्यों हो खड़ी | देख  लूँ   मैं  जरा रूप की फुलझड़ी | छोड़ दो - छोड़ दो आँसुओं की झड़ी | हँसके बिखरा भी दो मोतियों &nbsp...
 पोस्ट लेवल : मान जाओ प्रिये.....