ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 वासंती परिधान पहनकरक्षिति दुल्हन-सी शरमाई है शीश मुकुट मंजुल सुमनों का मृदुल हास ले मुसकाई है ।।पोर-पोर शृंगार सुशोभितसुरबाला कोई आई हैमुग्ध घटाए बहकी बहकीघट भर सुषमा छलकाई है।।शाख़-शाख़ बजती शहनाई सौरभ  गंध उतर आई  हैमंद मलय मगन लहराएप...
अनीता सैनी
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शीतल झरना झरे प्रीत काबहता अनुराग हूँ साथीसींचू सुमन समर्पण से कभी न बग़िया सूखे साथी।मैं तेरे बागों  की शोभादूर्वा बनकर लहराऊँ रात चाँदनी तारों वालीसपना बनकर सज जाऊँ बिछ जाऊँ बन प्रेम पुष्प पाँव चुभे न काँटे साथी ।। देहरी सजत...
 पोस्ट लेवल : प्रेम /शृंगारिक साथी
sanjiv verma salil
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लेख प्रेम गीत में संगीत चेतनासंजीव*साहित्य और संगीत की स्वतंत्र सत्ता और अस्तित्व असंदिग्ध है किन्तु दोनों के समन्वय और सम्मिलन से अलौकिक सौंदर्य सृष्टि-वृष्टि होती है जो मानव मन को सच्चिदानंद की अनुभूति और सत-शिव-सुन्दर की प्रतीति कराती है. साहित्य जिसमें सबक...
jaikrishnarai tushar
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 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -लिखने वाला अपने मन की प्रेम कहानी लिखता हैकोई राँझा-हीर तो कोई राधा रानी लिखता हैलिखने वाला अपने मन की प्रेम कहानी लिखता हैमीरा को भी सबने देखा अपनी-अपनी नज़रों सेकोई कहता जोगन कोई प्रेम दीवानी लिखता हैसब अपनी तकरीर में केवल बात...
अनीता सैनी
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 हर कोई आज-कल प्रेम में हैजैसे भोर की प्रीत में लिप्त हैं रश्मियाँत्याग की पराकाष्ठा के पार उतरती मद्धिम रौशनीसूर्य को आग़ोश में भर नींद में जैसे है सुलाती वैसे ही हर नौजवान आजकल प्रेम में है।गलियों में भटकता प्रेम भी प्रेम है समर्पण की भट्टी में अपना...
 पोस्ट लेवल : प्रेम /शृंगारिक
jaikrishnarai tushar
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 चित्र-साभार गूगलएक प्रेमगीत-चिट्ठियाँ पढ़ते हुए सुनसान वाले दिनझुकीं नज़रेंगुलमोहरमुस्कान वाले दिन ।याद हैंअब भी मुलेठी पान वाले दिन।पुस्तकों केबीच मेंतस्वीर रखकर देखना,राह चलतेआदमी परएक कंकड़ फेंकना,चिट्ठियाँपढ़ते हुएसुनसान वाले दिन ।आईने कोदेखकरहँसना स्वगत...
 पोस्ट लेवल : एक प्रेमगीत
अनीता सैनी
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 तमसा के पथ पर उजियाराजुगनू है जीवन का मेरे ।हृदय शाख पर खिले फूल सामधुमास अंगना का मेरे।उजली भोर गाती प्रभातीगुनगुनी धूप सी मृदु बोलीतारक दल से मंजुल चितवनशाँत चित्त मन्नत की मोलीसंवेदन अंतस तक पैंठामानस कोमल सुत का मेरे  ।।आँगन खिलता है शतदल सानयना निरख...
अनीता सैनी
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 राजस्थानी लोक भाषा में एक नवगीत।गोधुली की वेला छंटगीसाँझ खड़ी है द्वार सखीमन री बाताँ मन में टूटी बीत्या सब उद्गार सखी।।मन मेड़ां पर खड़ो बिजूकोझाला देर बुलावे है धोती-कुरता उजला-उजला हांडी  शीश हिलावे हैतेज़ ताप-सी जलती काया विरह कहे&nb...
अनीता सैनी
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 दुआ बन निखरुँ जीवन में रोळी-मौळी-सी सजूँ।हँसी बन बिखरुँ होठों परबाती-सी जल धीर धरुँ।लोकगीतों का गुलदस्तामधुर धुन की बाड़ मढूँ ।आँगन में छिड़कूँ प्रीत पुष्पसोनलिया पद छाप गढ़ूँ।अपलक हँसती आँखों कोनमी से कोसों  दूर रखूँ ।बुझे मन पर दीप्ति बनथार अँजु...
kumarendra singh sengar
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यह इस ब्लॉग की दो हजारवीं पोस्ट है. मई 2008 में ब्लॉग बनाने के बाद से लगातार लिखना हो रहा है. कभी रोज लिखा गया, एक दिन में दो-तीन पोस्ट लिखी गईं तो कभी दो-तीन दिन का अन्तराल होता रहा मगर ब्लॉग पर लिखना बंद नहीं हुआ. पिछले दो-तीन दिनों से इस दो हजारवीं पोस्टके विषय...