ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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विहंग दल की भाँति ढेने फैलाए लौट आतीं हैं यादें वे इंसान नहीं की नहीं लौटे दोबारा बंधनों की दहलीज़ लाँघ मिलतीं हैं अपनत्त्व से।पुकारतीं है उन्हीं के स्वर में यादें नयन गढ़ लेते हैं उन्हीं के छायाचित्र सेवा भाव का यह सागर हर लेता है मन की पीड़ा...
अनीता सैनी
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                                          पता नहीं कब?कौन ?किससे मिले...भोर की वेला में या ढलती साँझ मेंगड़रिए के लिबास में ओढ़े भावनाओं सरीखीसजा अपनत्त...
 पोस्ट लेवल : प्रेम /शृंगारिक
अनीता सैनी
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जलती देह नारी की विधाता,  क्रूर  निर्मम प्राणी  रचाया । क्रोध द्वेष दंभ हृदय में इसके, क्यों अगन तिक्त भार बढ़ाया ।सृजन नारी का सृजित किया है, ममत्त्व वसुधा पर लावन को।दुष्ट अधर्मी मानव जो पापी,आकुलता सिद्धी पावन को।भद्र भाव का करत...
अनीता सैनी
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प्रीत व्यग्र हो कहे राधिका, घूँघट ओट याद हर्षाती ।मुँह फेरुँ तो मिले कान्हाई, जीवन मझधारे तरसाती ।।साँझ-विहान गुँजे अभिलाषा, मनमोहिनी- मिलन को आयी। प्रिये की छवि उतरी नयन में, अश्रुमाला गिर हिय समायी। जलती पीड़ा दीप माल-सी,  ...
अनीता सैनी
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पी प्रीत में कान्हा से कहे राधिका, घूँघट ओढ़े  याद हर्षाया करती है, मुँह फेरुँ राह में मिले मनमौजन-सी, जीवन मझधार में रुलाया करती है।  साँझ-सवेरे गुँजित डोले अभिलाषा, मनमोहिनी मिलने मुझसे आयी, परछाई प्रिये की  उतरी नयनन में,&n...
अनीता सैनी
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गूँथे तारिका नित सुंदर स्वप्न, प्रीत अवनी पर है अवदात ।कज्जल कुँज में झूलता जीवन,  समय सागर की है  सौगात।।  लहराती है नभ में पहन दुकूल ,शीतल बयार संग प्रीत पली ।उमड़ी धरा पर सुधी मानव की ,खिला नव-अँकुर धरणी चली ।छिपे तम में  मन के...
अनीता सैनी
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मौन नितांत शून्य में खोजूँ ,प्रिया प्रीत अनुगामी-सी, झरते नयन हृदय में सिहरन, मधुर स्पंदन निष्कामी-सी।  तुहिन कणों से स्वप्न सजाए,मृदुल कंपन तन का गान,  शीतल झोंके का उच्छवास, ठहर हृदय ताने वितान। अंतर निहित प्रीत पथ मेरा,फिरी देश बंजा...
अनीता सैनी
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 मुक्त पवन का बहता झोंका,   कुछ पल का बने सहारा है,  निर्मल नीर चाँद की छाया,ऐसा सुख स्वप्न हमारा है। समय सरित बन के बह जाता,  रहस्यमयी लहरों में कौन, शून्यकाल की सीमा  बैठा,नीरव पुलिन मर्मान्तक मौन।  गहन...
अनीता सैनी
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टूटे पंखों से लिख दूँ मैं,बना लेखनी वह कविता।पीर परायी धरुँ हृदय पर,छंद बहे रस की सरिता।मर्मान्तक की पीड़ा लिख दूँ,पूछ पवन संदेश बहे।प्रीत लिखूँ छलकाते शशि को,भानु-तपिश जो देख रहे,जनमानस की हृदय वेदना,अहं झूलती सृजन कहे।पथ ईशान सारथी लिख दूँ,विहान कलरव की सुनीता।टूट...
अनीता सैनी
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बीज रोप दे बंजर में कुछ,यों कोई होश नहीं खोता,अंशुमाली से मोती मन केक्यों पीड़ा पथ में तू बोता।मधुर भाव बहता जीवन में,प्रीत प्रसून फिर नहीं झरता,विरह वेदना लिखे लेखनी,यों पाखी प्रेम नहीं मरता।नभ-नूर बिछुड़ तारीकाएँ,  व्याकुल होकर पुष्कर रोता, बीज रोप...