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sanjiv verma salil
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गीत:प्रेम कविता...संजीव 'सलिल'**प्रेम कविता कब कलम सेकभी कोई लिख सका है?*प्रेम कविता को लिखा जाता नहीं है.प्रेम होता है किया जाता नहीं है..जन्मते ही सुत जननि से प्रेम करता-कहो क्या यह प्रेम का नाता नहीं है?.कृष्ण ने जो यशोदा के साथ पालाप्रेम की पोथी का उद्गाता वही...
 पोस्ट लेवल : गीत प्रेम कविता
Roli Dixit
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तुम्हारा हाथ अपने हाथों में लेकरसदियों तक बैठना चाहती हूँ तुम्हारे पासऔर तुमसे पूछना चाहती हूँ वो सब कुछजो मैं तुम्हें पढ़ते हुए महसूस कर पाती हूँ…कैसे उतरती हैं मुंडेरें छत सेशाम की ढलती धूप में,कैसे कागज रोता है शब्दों से गले लगने को,कैसे प्रेमी की आँखों में रात ह...
Roli Dixit
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कभी ग़ौर से देखा हैअपनी दायीं हथेली की तर्जनी कोकुछ नहीं करती सिवाय लिखने के,चूमती रहती है कलम कोजब गढ़ रहे होते हो सुनहरे अक्षर....मेरी आँखों केतुम्हारे शब्द चूमने से भी पहले.कभी ग़ौर से सुनी है वो ध्वनिजो तुम्हारे कानों से निकलकरमेरी जिह्वा पर वास करती हैऔर बना देती...
Roli Dixit
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प्रेयसी बनना चाहती है वोपर बिना पहले मिलनप्रेम सम्भव ही कहाँ,सुलझाते हुए अपने बालों की लटेंउसे प्रतीक्षा होती है उस फूल कीजो उसका राजकुमार लाएगाजूड़े में लगाने को.चढ़ाते हुए चूल्हे पर चायवो मिठास ढूँढती हैकि उन हाथों में जाने से पहले प्यालामद्धम आँच के ज्वार भाटे सहे...
 पोस्ट लेवल : कविता प्रेम कविता
Roli Dixit
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वो यायावर थावो स्वयं के खोल में भीएक कोना ढूँढने वाली निर्मोहीजाने कैसे प्रेम हो गयाअब वो अपने आप मेंग़ुम सा शांतिदूतऔर वोउसके मन के ब्रह्मांड को खोजतीअनथक घुमक्कड़.
 पोस्ट लेवल : कविता प्रेम कविता
Roli Dixit
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सुनो ना!ये जो प्रेम हैमेरी दसों उँगलियों के पोरों परचक्र बना गया हैअब तो मानोगे नाप्रेम में मेरा राजयोग चल रहा.अगर दाएं पाँव का अँगूठा छोड़ दूँतो उन नन्हीं उँगलियों में भीसारे के सारे चक्र हैंअब तो ले चलोगे नाअपने साथ किसी दूसरे ग्रह परतब तक मैंये अंतिम चक्र भी बनात...
Roli Dixit
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मैं वो शहर हूँजिसके किनारे दर्द की झील बहती हैअक़्सर प्रेमी युगलएक-दूसरे को सांत्वना देते दिख जाते हैं.मैं वो पेड़ नहीं बनना चाहताजिनकी शाखों में उनके प्रेम को अमरत्व मिलेइससे बेहतर है, मैं वो कागज़ बनूँजिस पर प्रेम न पा सकने कीवो अपनी रोशनाई उड़ेल दें...अमर होना चाहूँ...
Roli Dixit
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तुमसे मिलते हीमैंने पहला शब्द ब्रह्मांड बोला थाऔर तुमने असुरतुम अविश्वास के अनुच्छेद में टहलते रहेऔर मैं विश्वास की सूची मेंतुमने पलाशों का झड़ना देखाऔर मैंने गुलमोहर का खिलनामेरे लिए बहुत आसान है कहनाकि तुम सही नहीं होफ़िर भी पूरे यक़ीन से कहती हूँ मैंकि तुम ही सही ह...
Roli Dixit
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मेरी प्रेम कविताएँबीथोवन के जवाबी ख़त नहींजो तुम पुष्टि कर सकोगेमेरे तुमसे प्रेम में होने कीन ही मैंब्राउनिंग की वो पोरफीरिया हूँजिसे उसके प्रेमी मेंउसी के बालों से फंदा बनाकरप्रेम में अमरत्व दियामेरा अमर प्रेमदिन में सूरज और रात में चाँद सा हैकैसे इनकार करोगे किरात...
Roli Dixit
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तुम्हारी चुप्पियों को भेजे गएमेरे बेहिसाब चुम्बनहमारे हृदयों को जोड़कर रखेंगे,तुम सहलाते रहना अपने दर्द कोमेरे नर्म हाथों की मानिंद.तुम तक नहीं आ सकती मैंसमय ने चूस ली है घुटने की चिकनाईमेरी आँखों पर रख दिया शिष्टता का रक्ततुमसे ज़्यादा तो मेराईश्वर का भी होने का मन...
 पोस्ट लेवल : कविता प्रेम कविता