ब्लॉगसेतु

Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–पाँचवां दिन–कल शाम को हेमकुण्ड साहिब से घांघरिया लौटा तो मेरी किस्मत के सितारे जगमगा रहे थे। मौसम साफ हो चुका था। मैं मौसम साफ होने के लिए वाहे गुरू से अरदास करता रहा। क्योंकि फूलों की घाटी जाने का असली मजा...
jaikrishnarai tushar
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चित्र-गूगल से साभारएक गीत-परदेसी केसर का एक फूल लानापरदेसीकेसर काएक फूल लाना ।धरती कीज़न्नत कोनज़र से बचाना ।शतदल कीगंध उठेमीठी डल झील से,पदमा सचदेवलिखेंकविता तफ़सील से,बंजारेघाटी केबाँसुरी बजाना ।हाथ मेंतिरंगा लेनीलगगन उड़ना,आतंकीआँधी सेले त्रिशूल लड़ना,बर्फ़ानी बाबाहरआ...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सुनो प्रिये !मैं बहुत नाराज़ हूँ आपसेआपने आज फिर भेज दियेचार लाल गुलाब के सुन्दर फूलप्यारे कोमल सुप्रभात संदेश के साथमाना कि ये वर्चुअल हैं / नक़ली हैं लेकिन इनमें समायाप्यार का एहसास / महक तो असली हैनादाँ हूँ / प्रकृतिप्रेमी हूँ  / कवि हूँकदाचित...
shashi purwar
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श्वेत चाँदनी पंख पसारे उतरी ज्यों उपवन में पुष्प कुटज के जीवट लगते चटके सुन्दर, वन मेंश्वेत श्याम सा रूप सलोना फूल सुगन्धित काया काला कड़वा नीम चढ़ा है ग्राही शीतल मायाछाल जड़ें और बीज औषिधि व्याधि हरे जीवन में पुष्प कुटज के जीव...
 पोस्ट लेवल : कुटज के फूल नवगीत गीत
Sandhya Sharma
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तुम्हारी कविता मेंखुश्बू है, फूल हैंपत्तियां, टहनी भीएक माली है जो करीने से संवारता हैशब्दों के नन्हे पौधेदेता है भावों की खादउखाड़ फेंकता हैअनचाहे विचारों कीखरपतवार...निदाई, गुड़ाई करता हैताकि पनप सकेंउम्मीदों की लतायेंऔर रखवाली भी करता हैकि कभी कोई तोड़ न लेअधख...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैंप्रकृति के पास औषधि का खजाना है जो युगों-युगों से जीवों के काम आते रहे हैं। इन्हीं में से एक कचनार का पेड़ भी है जो कई रोगों को जड़ से खत्‍म करने की क्षमत...
jaikrishnarai tushar
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गीत कवि माहेश्वर तिवारी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती बाल सुन्दरी तिवारी के साथहिंदी के सुपरिचित गीतकवि माहेश्वर तिवारी को समर्पित एक गीतफूलते कनेरों मेंएक दियाजलता हैआज भी अंधेरों में ।पीतल कीनगरी मेंफूलते कनेरों में ।छन्द रहेप्राण फूँकआटे की मछली में,घटाटोपमौसम मेंकौंध...
jaikrishnarai tushar
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एक लोकभाषा गीत-मोदी जी कै काम जैसे रात में अँजोरियामोदी जी कै काम जइसे रात में अँजोरिया ।फूलवा कमल कै महकै मह मह साँवरिया ।सड़कन क जाल बिछलस्वच्छता देखात बागैस के कनेक्शन सेहियरा जुड़ात बाघर-घर में शौचालयबड़ी नीक बात बाखतम बा दलालीबन्द होई चोर बजरिया ।ज्ञान औ विज्ञान...
Meena Sharma
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आँखों में बसा लो स्वप्न मेरे,होठों में दबा लो गीत मेरे !बंजारे मन का ठौर कहाँ,ढूँढ़ोगे तुम मनमीत मेरे !बस एक कहानी अनजानीसीने में छुपाकर जी लेना !!!फूलों की खुशबू बिखरेगी,तो बाग भी सारा महकेगा ।धीमे से आना द्वार मेरे,आहट से ये मन बहकेगा !तुम मेरी कहानी अनजानीसीने मे...
अरुण कुमार निगम
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छत्तीसगढ़ निवासी, देश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री वीरेंद्र सरल के सानिध्य से अनायास खिला एक फूल - “अप्रैल फूल” एक अप्रैल को रेडियो सिलोन से एक गीत प्रसारित होता था - एप्रिल फूल बनाया,तुमको गुस्सा आया तो मेरा क्या कसूर, जमाने का कसूर जिसन...
 पोस्ट लेवल : अप्रैल फूल